Heart Attack: शरीर की हलचलों से रहें सतर्क, दिल नहीं दे सकेगा धोखा; पेट की गैस को न लें हल्के में
डॉक्टरों की माने तो पिछले 20-30 सालों में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। पहले 50 की उम्र में दिल की जांच के लिए कहा जाता था। फिर उम्र को घटा कर 40 किया गया फिर 30 और अब 20 की उम्र में ही जांच करने की सलाह दी जा रही है।
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जबड़े से नीचे और नाभि से ऊपर पेट में गैस बनना, अचानक दर्द होना जैसे शरीर में होने वाले हलचल से सतर्क रहे, तो दिल के रोग से बच सकते हैं। ऐसे लक्षणों की पहचान कर सामान्य ब्लड टेस्ट व ईसीजी से भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक को रोका जा सकता है। देश में तेजी से बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों की रोकथाम और इसके इलाज में सुधार व गुणवत्ता लाने के लिए रविवार को देशभर के हृदय रोग विशेषज्ञ दिल्ली में जुटे। यहां हुए कॉडियोलॉजी सुम्मा 2023 सम्मेलन में डॉक्टरों ने अध्ययन के आधार पर दावा किया कि ब्लड टेस्ट करवाकर यदि मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल व थायराइड का हाल जान लें।
साथ ही ईसीजी करवाए तो दिल कभी धोखा नहीं दे पाएगा। इन जांच से स्थिति साफ हो जाएगी। देश में सडन कार्डियक अटैक व दिल के दौरे के बढ़ते मामलों के साथ इस दिशा में कई रिसर्च हुए हैं। अब कई दवाईयां और मशीन आ गई हैं, जिनकी मदद से हार्ट अटैक को रोका जा सकता है। इसके अलावा एम्स का धड़कन एप व हृदय कार्ड भी काफी मदद कर सकता है।
डॉक्टरों की माने तो पिछले 20-30 सालों में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। पहले 50 की उम्र में दिल की जांच के लिए कहा जाता था। फिर उम्र को घटा कर 40 किया गया फिर 30 और अब 20 की उम्र में ही जांच करने की सलाह दी जा रही है। दिल के रोग ग्रामीण क्षेत्र में भी तेजी से पैर पसार रहा है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है बाढ़सा गांव में लगाए गए कैंप में जांच के दौरान ऐसे कई मरीज पाए गए जिन्हें पता ही नहीं था कि वह दिल के रोगी हैं। ऐसे में जल्द जांच से रोग की रोकथाम हो सकती है।
जिम नहीं, टहलना ही काफी
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जिम करना जरूरी नहीं है। यदि आप सामान्य रूप से टहलते हैं या खड़े रहते हैं तो वह भी काफी है। विशेषज्ञों का कहना है अस्पताल में आने वाले ज्यादातर मरीज जिम मसल को मजबूत करने के लिए करते हैं। सप्लीमेंट का इस्तेमाल करते हैं। जबकि शरीर में मूवमेंट की जरूरत होती है, जो सामान्य रूप से टहल कर भी पूरा किया जा सकता है। अध्ययन बताते हैं कि जिम करने वालों के मुकाबले सामान्य रूप से टहलने वाले मरीज ज्यादा स्वस्थ पाए गए हैं।
- माता-पिता को दिल का रोग रहा हो
- ज्यादा धूम्रपान व शराब का सेवन
- ज्यादा मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल व चिंता होना
- खराब लाइफस्टाइल होना
- एसिडिटी होना, पसीना आना, असहज महसूस होना
- छाती में दर्द होना
पेट में गैस को न लें हल्के में
पेट में बनने वाली गैस को सामान्य में नहीं लेना चाहिए। अध्ययन के दौरान पाया गया है कि ऐसे 10 मरीजों में से दो मरीज दिल के रोगी पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जबड़े से नीचे और नाभि से ऊपर की जलन गंभीर होती है। इसके अलावा छाती के दोनों तरफ, आगे से पीछे के तरफ जाने वाली जलन हार्ट अटैक को न्यौता दे सकती है। यदि किसी मरीज में ये लक्षण दिखते हैं तो उन्हें तुरंत जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा गले में फंदे जैसा लगना, असहाय होना और पसीना आना भी एक लक्षण हो सकता है।
कोरोना महामारी के बाद दिल ने बदला रूप
कोरोना महामारी के बाद दिल में बदलाव देखा गया है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में पाया गया कि मरीजों की दिल की धड़कन सामान्य से तेज रहती है। हालांकि एक साल बाद इनमें कमी पाई जा रही है। इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान लोगों में बढ़ते तनाव व चिंता से भी दिल कमजोर हुआ है। धीरे-धीरे इसमें सुधार हो रहा है, लेकिन गति काफी धीमी है।
कम उम्र में हार्ट अटैक के शिकार हो सकते हैं चेन स्मोकर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप सेठ के मुताबिक कम उम्र में हार्ट अटैक के ज्यादातर मामले चेन स्मोकर या जन्म से ही हृदय रोगी में देखने को मिलते हैं। दिल से जुड़े रोग की पहचान आसान है। यदि ईसीजी और ब्लड टेस्ट करवाते हैं, तो काफी हद तक स्थिति साफ हो सकती है। वहीं 30 की उम्र के बाद हर किसी को जांच जरूरी करना चाहिए। यदि बीमारी को लेकर जागरूक रहेंगे तो समस्याएं थम सकती है।
जल्द अस्पताल पहुंचे तो बच सकता है दिल
मैक्स हेल्थकेयर में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बलबीर सिंह ने कहा कि दिल के रोग से जुड़े लक्षण दिखे तो एक घंटे के अंदर मरीज को अस्पताल पहुंचा देना चाहिए। ऐसा करने पर दिल को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं होता। यदि मरीज को डिस्प्रिन टैबलेट दी जाती है तो हार्ट अटैक से होने वाली मौत के मामले में भी 10 प्रतिशत की कमी आती है। साथ ही गोल्डन ऑवर का समय भी बढ़ता है।