फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   garbage pickers and wages collected treasure in delhi.

दिल्लीः कूड़ा बीनने वाले बच्चों ने जुटाया खजाना

Thu, 30 Oct 2014 02:48 PM IST
Updated Thu, 30 Oct 2014 02:48 PM IST
विज्ञापन
garbage pickers and wages collected treasure in delhi.

नन्हीं आंखों में बड़ा आदमी बनने का सपना लेकर बाराबंकी के सोनू यादव घर से भागकर दिल्ली तो पहुंच गए, लेकिन चंद घंटों में ही दुनिया की कड़वी हकीकत ने उनके सपनों को तोड़ दिया।

विज्ञापन


मगर सोनू समेत चुनिंदा बच्चों ने कूड़ा बीनने, भीख मांगने से लेकर बाल श्रम के दौरान इकट्ठा हुए पैसे को चिल्ड्रन डेवलपमेंट खजाना में जमा करवाते हुए आम बच्चों के लिए बचत की अनूठी मिसाल पेश की है।
विज्ञापन


एक एनजीओ के माध्यम से राजधानी से शुरू हुई इस योजना से अब देश विदेश के 13 हजार से अधिक बच्चों ने जुड़कर अपने लिए 28.50 लाख रुपये का खजाना जमा कर लिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बच्चों की मदद की अनोखी मुहिम

garbage pickers and wages collected treasure in delhi.

एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में ही आठ हजार से अधिक बच्चे बाल श्रम से जुड़े हुए हैं। इस अनोखी मुहिम में बच्चों की मदद करने वाली संस्था बटरफ्लाई की निदेशिका रीटा पानिकर के मुताबिक, 2001 में चांदनी चौक में पांच बच्चों के लिए इसकी शुरुआत की थी।

लेकिन कोई भी बैंक अकाउंट खोलने के लिए तैयार नहीं था। पहले तो एनजीओ अपने पास पैसा जमा करता रहा, लेकिन करीब चार साल बाद बच्चों के नाम से कोऑपरेटिव बैंक में खाता खुलवाया गया। जब बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो अलग-अलग अकाउंट की जरूरत महसूस हुई।

इसके बाद हमने चिल्ड्रन डेवलपमेंट बैंक खोला, लेकिन आरबीआई की मनाही के चलते बैंक की बजाय उसका नाम चिल्ड्रेन डेवलपमेंट खजाना कर दिया गया। इसी बीच बच्चों के लिए काम करने वाली अमेरिकी संस्था चाइल्ड होप के कुछ अधिकारी दिल्ली पहुंचे और वे भी जुड़ गए।

आठ देशों के 13 हजार बच्चे जुडे़

garbage pickers and wages collected treasure in delhi.

इस योजना में शामिल कुल 13, 229 बच्चों में से 56 फीसदी लड़के तो 44 फीसदी लड़कियां शामिल हैं। भारत, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल समेत अफ्रीका के दो देश घाना और मेडागास्कर के बच्चे जुड़े हैं।

भारत में जम्मू कश्मीर, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, महाराष्ट्र और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में चिल्ड्रन डेवलपमेंट खजाना की ब्रांच हैं, जहां बच्चे अपनी बचत को जमा करवाते हैं।

पॉकेट मनी से आम बच्चों को जोड़ने की शुरुआत
निजामुद्दीन की तब्बसुम (13) बेहद ही मामूली परिवार से ताल्लुक रखती है। पिता एक ढाबे में रोटी बनाते हैं तो मां बेहद मुश्किल से परिवार को चला रही है। तब्बसुम भी इस मुहिम से जुड़ी हुई है।

सरकारी स्कूल में पढ़ने के साथ-साथ उसने एनजीओ के माध्यम से उसने कूड़ा बीनने वाले बच्चों को जोड़ा, ताकि वे भी अपनी बचत को खजाने में भर सकें। इसके लिए तब्बसुम ने यमुना बाजार, ओखला मंडी के साढ़े चार सौ बच्चों को जोड़ा है और करीब सात हजार रुपये की रकम भी जमा करवाई है।

दिल्ली में स्पेशल ट्रेनिंग लेने पहुंचे 44 बच्चे

garbage pickers and wages collected treasure in delhi.

चिल्ड्रन डेवलपमेट खजाने से जुड़ने वाले बच्चों को अब लाइफ स्किल डेवलपमेंट एजुकेशन भी दी जा रही है। इसी के तहत आठ देशों समेत के कुल 44 बच्चों को यह ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें से 28 भारत तो अन्य बाहरी देशों से आए हुए हैं।

खजाने में जमा पैसे को बच्चे करते हैं मॉनिटर
जमा होने वाले पैसों का पूरा हिसाब बच्चे स्वयं रखते हैं। दिल्ली में खजाने की कुल 16 ब्रांच हैं, जहां बच्चे पैसा जमा कर सकते हैं। हालांकि भारत समेत आठ देशों में कुल 152 ब्रांच हैं। इसके लिए प्रति ब्रांच चाइल्ड वॉलंटियर मैनेजर भी नियुक्त किया गया है, जोकि स्वयं उससे जुड़ा हुआ होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed