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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Ganpati immersion will take place in artificial ponds, preparations are underway to protect the Yamuna from pollution

Delhi NCR News: कृत्रिम कुंडों में होगा गणपति विसर्जन, यमुना को प्रदूषण से बचाने की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 06:39 PM IST
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-नियम टूटने पर लगेगा जुर्माना, पूजा सामग्री डालने पर भी रोक
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प्रथम चौहान
पूर्वी दिल्ली। गणेश चतुर्थी के पर्व के साथ ही पूर्वी दिल्ली में बप्पा की विदाई और विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया है। मुख्य विसर्जन 25 सितंबर को होना है, लेकिन घरों में गणपति की स्थापना करने वाले श्रद्धालुओं ने तीसरे दिन से ही प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू कर दिया है। इस बार यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने नदी में सीधे मूर्ति विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगा दी है।



श्रद्धालुओं की सुविधा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में करीब 90 कृत्रिम तालाब तैयार किए जा रहे हैं। इनमें 20 से अधिक कृत्रिम तालाब पूर्वी दिल्ली के शाहदरा, यमुना विहार, पटपड़गंज और आसपास के इलाकों में बनाए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालु निर्धारित कृत्रिम कुंडों में ही प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक परंपरा के साथ यमुना की स्वच्छता सुनिश्चित करना है।
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यमुना में पूजा सामग्री डालने पर भी रोक



दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने मूर्ति विसर्जन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गणपति या किसी अन्य मूर्ति का विसर्जन यमुना अथवा किसी प्राकृतिक जलाशय में करने पर रोक है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा यमुना में फूल, पूजा सामग्री, खाद्य पदार्थ और तेल आदि डालने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
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विसर्जन के बाद मिट्टी से बढ़ेगी हरियाली



कृत्रिम कुंडों में विसर्जन की व्यवस्था से पर्यावरण को दोहरा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे प्रतिमाओं में इस्तेमाल सामग्री सीधे यमुना में जाने से बचेगी और नदी के पानी में प्रदूषण का खतरा कम होगा। वहीं, विसर्जन के बाद कुंडों में जमा होने वाली मिट्टी को भी उपयोग में लाया जाएगा। प्रशासन की योजना के अनुसार इस मिट्टी का इस्तेमाल पौधे उगाने और हरियाली बढ़ाने के लिए किया जाएगा।




इस तरह प्रशासन धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे निर्धारित स्थानों पर ही विसर्जन करें और यमुना को स्वच्छ रखने में सहयोग दें।
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