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Delhi: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई समेत तीन आरोपी जबरन वसूली मामले में बरी, कोई ठोस सबूत नहीं
Sun, 08 Mar 2026 09:14 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Sun, 08 Mar 2026 09:14 AM IST
सार
अदालत ने कहा कि केवल धमकी देना या पैसे की मांग करना, बिना किसी भुगतान के, जबरन वसूली का अपराध नहीं बनता। रिकॉर्ड में आरोपियों के खिलाफ ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य भी नहीं मिला जिससे आरोप साबित हो सकें।
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विस्तार
साकेत कोर्ट ने एक वकील से एक करोड़ रुपये की जबरन वसूली के प्रयास से जुड़े मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई समेत तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूपुर गुप्ता की अदालत ने लॉरेंस बिश्नोई, हरेन सरपदादिया और आशीष शर्मा को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप नहीं लगाया कि धमकी के कारण उसने किसी को पैसा या संपत्ति दी थी जबकि जबरन वसूली का अपराध के लिए डर दिखाकर धन या संपत्ति को जुटाना जरूरी है।
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अदालत ने कहा कि केवल धमकी देना या पैसे की मांग करना, बिना किसी भुगतान के, जबरन वसूली का अपराध नहीं बनता। रिकॉर्ड में आरोपियों के खिलाफ ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य भी नहीं मिला जिससे आरोप साबित हो सकें। मामले के अनुसार, सनलाइट कॉलोनी थाना क्षेत्र में रहने वाले रमनदीप सिंह ने अप्रैल साल 2023 में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 23-24 अप्रैल की रात उन्हें एक अज्ञात नंबर से कई बार फोन आए, जिनमें एक करोड़ रुपये की मांग की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। जांच के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने लॉरेंस बिश्नोई, हरेन सरपदादिया, आशीष शर्मा और संपत नेहरा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि अभियोजन ने आरोपियों की भूमिका से जुड़े आवश्यक तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखा है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपियों का नाम एफआईआर में नहीं था और उनके पास से कोई बरामदगी भी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी केवल सह आरोपियों के बयान के आधार पर की गई थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसके आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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