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Maha Kumbh 2025 : सीपीसीबी ने नई रिपोर्ट में एनजीटी को बताया- महाकुंभ में नहाने योग्य था गंगा का पानी
Mon, 10 Mar 2025 03:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 10 Mar 2025 03:07 AM IST
सार
बोर्ड की 28 फरवरी की नई रिपोर्ट बताती है कि विश्लेषण 12 जनवरी से 22 फरवरी तक सामूहिक स्नान के दस स्थानों पर किया गया।
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Maha Kumbh 2025
- फोटो : PTI
विस्तार
प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान गंगा का जल नहाने लायक था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यह बात राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी नई रिपोर्ट में कही है। यह रिपोर्ट सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई है।
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सीपीसीबी का दावा है, अलग तारीखों पर एक ही जगह और एक दिन में अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए नमूनों के आंकड़ों में भिन्नता थी। इनसे नदी के समग्र जल की गुणवत्ता का पता नहीं चलता। इससे पहले, सीपीसीबी ने 17 फरवरी को एनजीटी को दी रिपोर्ट में कहा था कि विभिन्न स्थानों पर फीकल कोलीफॉर्म (एफसी) का स्तर प्राथमिक मानकों के अनुरूप नहीं मिला।
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बोर्ड की 28 फरवरी की नई रिपोर्ट बताती है कि विश्लेषण 12 जनवरी से 22 फरवरी तक सामूहिक स्नान के दस स्थानों पर किया गया। निगरानी के लिए 20 बार दौरा किया गया। इसके मुताबिक नदी में एफसी की औसत मात्रा 1,400 थी, जबकि इसकी मानक सीमा 2,500 यूनिट प्रति 100 लीटर है। घुलित ऑक्सीजन (डीओ) मानक 5 मिलीग्राम प्रति लीटर की तुलना में 8.7 था।
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गंगा में पांच और यमुना में दो जगह की निगरानी
रिपोर्ट के मुताबिक, अमृत स्नान वाले दिन समेत सप्ताह में दो बार गंगा में पांच स्थानों व यमुना नदी में दो स्थानों पर जल निगरानी की गई। सीपीसीबी ने पानी की गुणवत्ता को पीएच, डीओ व एफसी के पैमानों पर जांचा। विशेषज्ञ समिति ने आंकड़ों में बदलाव के मुद्दे की जांच की और कहा कि ये आंकड़े एक विशिष्ट स्थान व समय पर जल की गुणवत्ता को दर्शाते हैं।