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खेलों को संवारने के लिए सरकार के पास नहीं बजट, दावों के विपरित है हकीकत 

Mon, 29 Aug 2016 12:03 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Mon, 29 Aug 2016 12:03 AM IST
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Games for grooming government budget, contrary to the claims Reality
सीएम खट्टर - फोटो : अमर उजाला

ओलंपिक में पदक जीतने के बाद साक्षी मलिक और पीवी सिंधु पर सरकारें धन की बारिश कर रही हैं, लेकिन बुनियादीस्तर पर खेल को संवारने के लिए बजट नहीं है। 

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शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय एक खेल के आयोजन के लिए महज 40 रुपये दिया जाता है। खिलाड़ियों के डाइट के लिए महज 75 रुपये मिलते हैं, वो भी खेलने के बाद क्लेम करना होता है।
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भले ही सुनने में अटपटा लगे, लेकिन शिक्षा विभाग के खेल महकमे की यही हकीकत है। भूखे पेट ओलंपिक में पदक जीतने के बारे में सोचना भी सरकारी स्कूल के खिलाड़ियों के लिए बेमानी है।
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दरअसल, शिक्षा के साथ खेल को जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर प्रदेश के खेल मंत्री अनिल विज बार-बार जोड़ देते हैं, लेकिन हकीकत इससे परे है। 

विशेषज्ञों के मुताबिक स्कूल ही खेल की बुनियाद है, लेकिन बदहाल व्यवस्था में खिलाड़ियों का ओलंपियन बनना नामुमकिन है। जिला स्तर पर 62 खेल प्रतियोगिता के लिए 2500 रुपये खर्च करने का बजट होता है। 

इन प्रतियोगिताओं में 200 स्कूलों के 4000 से ज्यादा विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं। वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल और स्पोर्ट्स एसोसिएशन की ओर से ऐसी प्रत्येक प्रतियोगिता में औसतन 20 से 25 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। 

बता दें कि हर वर्ष स्कूल स्तर पर जिला स्तरीय प्रतियोगिता शिक्षा विभाग द्वारा कराई जाती है। इसमें ओलंपिक और गैर ओलंपिक सभी खेल 62 खेलों का आयोजन किया जाता है, लेकिन फंड के अभाव में खिलाड़ियों को विभाग की ओर से सही से न तो रिफ्रेशमेंट मिलती है और न ही कोई अन्य सुविधा। 

फंड के अभाव का सीधा असर खिलाड़ियों की सोच पर पड़ता है। जिसकी वजह से जिला व प्रदेश स्तरीय मुकाबले के आगे सोचना भी मुनासिब नहीं लगता है। जबकि सरकारी स्कूल में भी खेल के नाम पर प्रति छात्रों से कक्षा के हिसाब से खेल फंड लिया जाता है।
 
75 रुपये है डाइट का फंड
जिला स्तरीय मुकाबले के लिए खिलाड़ियों को 75 रुपये डाइट का फंड है। इसके लिए कुछ शर्तें है। पहली शर्त कि खिलाड़ी के स्कूल से खेल का आयोजन स्तर यदि 08 किलोमीटर के दायरे में है तो उसे कुछ भी नहीं मिलेगा। 


पानी का इंतजाम भी खुद करना होगा। अगर 10 किलोमीटर से अधिक दूरी है तो उसे 75 रुपये दिया जाएगा। पहले खिलाड़ी को मैदान में पसीना बहाना होगा, उसके बाद क्लेम करने पर स्कूल के फंड से इसका भुगतान किया जाएगा।

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