'सिसोदिया के बुलाने पर दिल्ली आया था गजेंद्र'
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आप की रैली में बुधवार को फांसी लगाकर जान देने वाले राजस्थान के दौसा गांव के किसान गजेंद्र सिंह के एक रिश्तेदार गिरधारी सिंह ने बताया कि गजेंद्र ने दो दिन पहले ही घर छोड़ दिया था।
उनका कहना है कि गजेंद्र की मौत के बारे में उन्हें टीवी से पता चला। उन्होंने टीवी पर देखा कि गजेंद्र दिल्ली में है और उसने आत्महत्या का प्रयास किया है।
हजारों की भीड़ में गजेंद्र के फांसी लगा लेने और उसे ना बचाए जा सकने के लिए दुख और गुस्सा जताते हुए उसके रिश्तेदार गिरधारी सिंह ने कहा कि 'वो कोई जंगल थोड़े न था जहां रैली हो रही है, वहां कोई आदमी उसे बचाने वाला नहीं था?'
वो सुसाइड नोट नहीं बल्कि...
वहीं गेजेंद्र के चाचा जयवीर सिंह ने भी ये बात कही कि उसकी मौत के बारे में उन्हें टीवी से ही पता चला। उन्होंने ये बताया कि उन्हें खबर है कि वो मनीष सिसोदिया के संपर्क में था।
गिरधारी सिंह ने कहा कि ,'यहां कोई तकलीप नहीं थी। ये जो 15-20 दिन पहले बरसात हुई, फसल नष्ट हो गई, किसी ने रिपोर्ट सही नहीं दी तो हमें रिप्रेसेंट करने गया था।'
गिरधारी सिंह ने आप से नाराजगी जताते हुए कहा कि 'कोई मैसेज नहीं आया आप की तरफ से। रैली में तो बचाया नहीं वो क्या फोन करेंगे?' वहीं गजेंद्र के चाचा ने बताया कि उम्मीद तो लेकर गए थे कि भला हो।
जिसे गजेंद्र का सुसाइड नोट माना जा रहा था वो परची थी जिसे मौका मिलने पर देखकर बोलने के लिए दिया गया था। उसके चाचा बोले कि 'परची तो इसलिए दी थी कि बोलना है पर मौका ही नहीं मिला।'
मनीष सिसोदिया के बुलावे पर गजेंद्र पहुंचा था दिल्ली!
गजेंद्र के भाई से जब पूछा गया कि वो उसकी मौत के लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं तो उन्होंने कहा कि, मैं खुद केजरीवाल जी को दोषी मानता हूं इस मामले में।
वहीं जब पत्रकार ने गजेंद्र के भाई विजेंद्र से ये पूछा कि क्या कल का बुलावा मनीष सिसोदिया की तरफ से था तो वो बोले कि, 'मुझे तो उन्होंने यही बताया था।'
इस वक्त गजेंद्र का पूरा परिवार सदमे में है। उसके पिता की हालत तो इतनी खराब है कि वो रह-रहकर बेहोश हो जा रहे हैं।
रैली से पहले गजेंद्र गया था मनीष सिसोदिया के घर
वहीं गजेंद्र के एक कजिन राजेंद्र ने बताया कि उन्हें पता चला है कि गजेंद्र रैली से पहले बुधवार सुबह करीब 11 बजे मनीष सिसोदिया के घर गया था।
राजेंद्र कहते हैं कि नहीं पता कि रैली में क्या स्पीच दिया गया और उसे किस तरह उकसाया गया कि वो आत्महत्या का कदम उठाने को मजबूर हुआ।
गजेंद्र के घरवालों का कहना है कि वो तो केवल गांववालों की बात लेकर दिल्ली गया था। उसका सुसाइड का कोई इरादा नहीं था। बता दें कि वो पहले भी कई रैलियों में जाता रहा है और वह पगड़ियां बांधने के लिए भी मशहूर था। वह किसानों के हक में अक्सर अपनी आवाज उठाता रहता था।
'आर्थिक रूप से संपन्न था गजेंद्र'
जहां बुधवार को गजेंद्र की आत्महत्या के बाद सभी ओर यही शोर था कि उसने बदहाली और फसल बर्बाद होने के चलते खुदखुशी की वहीं दौसा के तहसीलदार सतीश कुमार जैन ने बताया है कि वह आर्थिक रूप से संपन्न था। उन्होंने ये भी बताया कि इस क्षेत्र में 24 प्रतिशत से भी कम फसले प्रभावित हुई हैं।
सतीश ने ये भी बताया कि उन्होंने सरकार को रिपोर्ट भेज दी है। हालांकि मुआवजे के लिए जो सीमा है वह 33 प्रतिशत निर्धारित की गई है जिसे पीएम मोदी ने खुद अपने एक स्पीच में बताया था।
सतीश तो ये भी बोले कि यह मत सोचिएगा कि गजेंद्र की मौत के पीछे आर्थिक कारण हैं क्योंकि वह रुपए पैसे से मजबूत था। उन्होंने बताया कि उन्हें सतीश की तरफ से मुआवजे के लिए कोई दरख्वास्त नहीं आई है।