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Delhi: शिक्षा विभाग-MCD के झगड़े से अधर में लटका छात्राओं का भविष्य, 10वीं के बाद स्कूल छोड़ने को हुईं मजबूर

Mon, 08 Jan 2024 06:26 AM IST
विजय पुंडीर राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 08 Jan 2024 06:26 AM IST
सार

दिल्ली के जगतपुर गांव में दसवीं तक का स्कूल 12वीं तक अपग्रेड नहीं हो पाया। इस कारण दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए गांव के बच्चों को तीन-चार किमी दूर स्थित स्कूल में जाना पड़ता है।

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future of girl students hangs in balance due to the dispute between Education Department and MCD
जगतपुर गांव में कक्षा दसवीं तक स्कूल - फोटो : भूपिंदर सिंह

विस्तार

दिल्ली के शिक्षा विभाग और एमसीडी के झगड़े से गरीब छात्राओं का भविष्य अधर में लट गया है। दोनों के झगड़े के कारण मध्य दिल्ली के जगतपुर गांव में दसवीं तक का स्कूल 12वीं तक अपग्रेड नहीं हो पाया। इस कारण दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए गांव के बच्चों को तीन-चार किमी दूर स्थित स्कूल में जाना पड़ता है। ऐसे में लड़के तो किसी तरह दूसरे स्कूल में चले जाते हैं, लेकिन साधन के अभाव में गरीब छात्राएं स्कूल तक नहीं पहुंच पाती और उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

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दरअसल, रविवार को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर जिलाधिकारी अवनीश कुमार गांव में रात्रि प्रवास के लिए पहुंचे। इस दौरान सुबह गांववासियों के साथ संवाद कार्यक्रम हुआ। उसके बाद डीएम गांववासियों के साथ क्षेत्र की समस्या को सुनने के लिए क्षेत्र में दौरे पर निकले। वह गांव की गली नंबर नौ स्थित स्कूल में पहुंचे। यहां पर गांव निवासी रणवीर सिंह ने डीएम को बताया कि इस स्कूल के लिए गांववासियों ने जमीन दी थी। मौजूदा समय में दिल्ली के शिक्षा विभाग और दिल्ली नगर निगम जमीन को लेकर आपस में उलझे हुए हैं। जिस कारण स्कूल का विस्तार नहीं हो पा रहा।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन से कई बार मांग कर चुके हैं कि इस स्कूल को अपग्रेड कर 12वीं तक किया जाए। ताकि गरीब लड़कियों को आगे पढ़ने का मौका मिले। लेकिन झगड़े के कारण कमरे नहीं बन पा रहे। यदि कमरे की संख्या बढ़ जाती है तो स्कूल को अपग्रेड करने में आसानी होगी। मौजूदा समय में इस स्कूल में दो हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। संख्या ज्यादा होने के कारण स्कूल को दो पाली में चलाना पड़ता है। वहीं बैठक के बाद जिला अधिकारी अवनीश कुमार ने कहा कि गांव को मॉडल के तौर पर विकसित करना है। इसके लिए लोगों के सुझाव और समस्याओं को सुना है। इन समस्याओं को सभी विभागों के साथ मिलकर तय समय में पूरा किया जाएगा।

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खरीदकर पी रहे हैं पानी
गांववासियों का कहना है कि गांव में पीने का स्वच्छ पानी का अभाव है। यहां ज्यादातर लोग खरीदकर पानी पीने के लिए मजबूर हैं।  चर्चा के दौरान गजेंद्र सिंह बबली ने कहा कि गांव यमुना नदी के पास है। गांव की काफी जमीन यमुना में खराब भी हो गई, लेकिन गांव में पर्याप्त पीने का पानी नहीं है। पानी की समस्या के लिए कई बार प्रशासन को बोला जा चुका है, लेकिन समस्या हल नहीं हो पाई।

रिकार्ड से गायब है दो हजार बीघा से अधिक
जमीन : कार्यक्रम के दौरान गांववालों ने डीएम को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में जगतपुर गांव के निवासियों ने कहा कि गांव की 117 खसरे की जमीन मिसिंग हैं। इसमें करीब दो हजार बीघा जमीन है। प्रशासन ने इस जमीन को अपने रिकार्ड में दर्ज नहीं किया है।

सभी जिलों के गांवों में रुके डीएम
रविवार को उत्तर जिले के डीएम यश चौधरी पल्ला गांव में, दक्षिणी दिल्ली की डीएम मेकाला चैतन्य प्रसाद फतेहपुर बेरी गांव में, दक्षिण पूर्व की डीएम ईशा खोसला पुल प्रहलादपुर गांव में, नई दिल्ली के डीएम संतोष कुमार राय समालखा गांव में, दक्षिण-पश्चिम के डीएम लक्ष्य सिंघल खेड़ा डाबर गांव में, पश्चिमी दिल्ली के डीएम किन्नी सिंह बापरोला गांव में, उत्तर-पूर्वी की डीएम अरुण मिश्रा बाक़ियाबाद में रुके और समस्या सुनी।

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