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दिल्ली के सरकारी अस्पताल के ग्लूकोज में मिला फंगस, सूचना मिलते ही आनन-फानन में पहुंचे अधिकारी

Tue, 08 Jan 2019 05:22 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 08 Jan 2019 05:22 AM IST
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Fungus found in glucose in Delhi Government Hospital
ग्लूकोज में मिला फंगस लगा - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली सरकार भले ही सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवा भंडारण का दावा करती हो, लेकिन सोमवार को एक सरकारी अस्पताल ने सरकार के इन दावों और दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राजधानी के अरुणा आसफ अली अस्पताल में एक ग्लूकोज में फंगस पाई गई। वहीं, ये खबर सुनते ही अस्पताल के डॉक्टरों के पसीने छूट गए। आनन-फानन में मौके पर पहुंचे आला अधिकारियों ने बोतल को जांच के लिए लैब भेज दिया। पड़ताल के बाद पता चला कि कुछ समय पहले मंगाई एक हजार ग्लूकोज बोतलों में से छह शेष बची थीं, जिनमें से एक बोतल में फंगस मिली है।  

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सिविल लाइन स्थित अरुणा आसफ अली अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक मरीज को नर्स ने पहले कैनुला लगाया, उसके बाद वे ग्लूकोज लेकर आईं और मरीज को चढ़ाने लगीं। इसी बीच एक तीमारदार की नजर बोतल में मौजूद काले पदार्थ (फंगस) पर पड़ी। उसने नर्स से इसके बारे में बोला, जिसे देख नर्स भी आश्चर्य में पड़ गईं। कुछ देर में पूरे वार्ड में ग्लूकोज की बोतल में फंगस की खबर फैल गई। स्ट्रेचर पर लेटे मरीज भी खबर सुन परेशान हो उठे। खबर पाकर डॉक्टर वार्ड में पहुंचे और जांच के बाद बोतल में फंगस होने की आशंका जताई।  
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प्रबंधन तक मामला पहुंचते ही तत्काल बोतल को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने का आदेश हो गया। डॉक्टरों का कहना है कि अगर ग्लूकोज मरीज को चढ़ जाता तो उसके शरीर में संक्रमण फैल सकता था और जान को खतरा भी हो सकता था। उधर, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग तक मामले की जानकारी पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि मंगलवार को विभागीय टीम आगे की कार्रवाई से पहले अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब करेगी।        
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अस्पताल के चिकित्सा निदेशक सुमित सिन्हा ने बताया कि मार्च 2018 में एक हजार बोतलें मंगाई थीं। डेट्रोक्स नॉर्मल सेलाइन (डीएनएस) की इन बोतलों में से एक में कुछ संदिग्ध चीज पाई गई है। देखने में ये फंगस जैसी प्रतीत होती है। हालांकि, सभी बोतलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। डॉ. सिन्हा ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय खरीद प्राधिकरण (सीपीए) को भी इसकी सूचना दे दी है।

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