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यूपी में आधे से ज्यादा सैंपल मानकों पर नहीं उतरे खरे, लगा जुर्माना, जानें अन्य राज्यों की स्थिति

Tue, 26 Nov 2019 05:43 PM IST
पूजा त्रिपाठी परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 26 Nov 2019 05:43 PM IST
सार

- खाद्य उत्पादों की जांच को लेकर राज्यवार रिपोर्ट की जारी, जुर्माने में हुई बढ़ोत्तरी
- यूपी के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली में भी स्थिति गंभीर
- वर्ष 2018-19 में केंद्र सरकार ने 32.58 करोड़ रुपये जुर्माने में वसूले

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fssai report 2018 19 UP more than half sample failed fine imposed read other state condition
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

खाद्य उत्पादों को लेकर उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वर्ष 2018-19 में पूरे देश में उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए कार्रवाई की थी जिसके तहत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से तकरीबन 22,583 खाद्य सैंपल की जांच में 11,817 मानकों के अनुरूप नहीं मिले।

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इनमें से 1404 असुरक्षित, 7907 मिलावटी और 2506 सैंपल पर लेबलिंग गलत तरीके से पाई गई। इसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए देश में सबसे ज्यादा जुर्माना 15.89 करोड़ रुपये भी एकत्रित किया है। ठीक इसी तरह हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी स्थिति गंभीर मिली है।
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सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने वर्ष 2018-19 में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर की गई कार्रवाई पर राज्यवार रिपोर्ट जारी की गई।
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इसमें प्राधिकरण ने बीते तीन वर्षों की तुलना करते हुए बताया कि देश भर से 1,06,459 सैंपल की जांच की गई जिनमें से 3.7 फीसदी स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए। जबकि 15.8 फीसदी सैंपल मिलावटी और 9 फीसदी में लेबलिंग नियमों के खिलाफ की गई।

जानिए राज्यों का हाल

पहली बार प्राधिकरण की ओर से मिलावटी उत्पादों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है। देश भर से वर्ष 2016 में 78,340 और साल 2017 में 99,533 सैंपल की जांच में क्रमश: 18,325 व 24,262 मानकों के विपरीत्त मिले थे। जबकि वर्ष 2018 में 7 फीसदी ज्यादा सैंपल लेने के बाद 25 फीसदी ज्यादा सैंपल मिलावटी मिले हैं।

रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 7063 में से 1369, महाराष्ट्र में 4742 में से 1036, राजस्थान में 5760 में से 2147 और तमिलनाडू में 5730 में से 2601 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।

राज्य      कुल सैंपल     मिलावटी     केस     जुर्माना
यूपी        22583       11817       8957   15.89 करोड़
उत्तराखंड  755          35            36       28.53 लाख
पंजाब   11920     3961      1885      1.57 करोड़
हिमाचल प्रदेश  229    43     14          9.65 लाख
हरियाणा     2929      737    535       51.16 लाख
जम्मू कश्मीर   3600   1416    708     57.18 लाख
दिल्ली      2461      485     139     47.16 लाख
चंडीगढ़    315        30       58      3.35 लाख 
(नोट : अपराधिक और सिविल दोनों प्रकार के केस दर्ज हुए हैं।)

राज्य    असुरक्षित     गुणवत्ता खराब    गलत लेबलिंग    कुल मिलावटी
यूपी       1404              7907                 2506              11817
उत्तराखंड  00                 25                    10                   35
पंजाब       92               2015                 1854               3961
हिमाचल प्रदेश   06         20                      17                 43
हरियाणा          95        459                    183                737
जम्मू कश्मीर   44        732                     640               1416
दिल्ली            96        148                      241                485
चंडीगढ़           03        16                        11                   30

मिलावट के खिलाफ कार्रवाई में ये राज्य सुस्त
प्राधिकरण के अनुसार देश के 10 राज्यों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई करने में विभागीय सुस्ती देखने को मिली है। इसके पीछे कई वजह हैं जैसे-स्टाफ की कमी, पर्याप्त प्रयोगशालाओं का अभाव इत्यादि। इनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, असम, झारखंड, ओड़िशा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तेलंगना शामिल हैं।

मिलावट की वजह से 31 तरह की बीमारियां फैलीं
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि मिलावटी खाद्य उत्पादों की वजह से कई जानलेवा बीमारियां पांव पसार रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी खाद्य उत्पादों से होने वाली तकरीबन 31 बीमारियों की पुष्टि कर चुका है जिसमें डायरिया, टाइफाइड के अलावा खाद्य उत्पाद जनित बीमारियां (एफबीडी) संक्रमण, एचआईवी, मलेरिया, टीबी, हेपेटाइटिस ए इत्यादि को बढ़ावा मिलता है। एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल का कहना है कि बीते काफी समय से मिलावट से जुड़ी खबरें अलग अलग राज्यों से मिल रही हैं। जनता का विश्वास पाने के लिए प्राधिकरण लगातार राज्यों के साथ मिलकर ठोस कार्रवाई कर रहा है। साथ ही सरकार विभिन्न राज्यों में प्रयोगशालाएं और जागरूकता को बढ़ावा भी दे रही है।
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