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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   From archives to screen: Reflecting on cinema's hidden heritage

अभिलेखों से पर्दे तक: सिनेमा में छिपी विरासत पर मंथन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 09:33 PM IST
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- दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पैनल चर्चा, आर्काइव्स को सिनेमा से जोड़ने पर जोर
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत की सांस्कृतिक स्मृतियों में छिपी कहानियों को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने पर दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में मंथन हुआ। महोत्सव के दूसरे दिन फ्रॉम आर्काइव्स टू स्क्रीन विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में फिल्मकारों और इतिहासकारों ने अभिलेखीय धरोहर के सीमित उपयोग पर चिंता जताई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सहयोग से आयोजित इस सत्र में फिल्मकार बप्पा रे, उत्पल बोरपुजारी और फिल्म इतिहासकार इकबाल रिजवी ने विचार साझा किए। संचालन आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र प्रमुख अनुराग पुनेठा ने किया। वक्ताओं ने कहा कि भारत के पास दस्तावेजों, तस्वीरों और विज्ञापनों का विशाल खजाना है, जिसे सिनेमा के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।

चर्चा में विभाजन, जनजातीय इतिहास और मौखिक परंपराओं जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए फिल्मकारों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई। इससे पहले अडूर गोपालकृष्णन ने आईजीएनसीए में 1950 से 1990 के दशक के प्रिंट विज्ञापनों की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे बीते दौर की दृश्य संस्कृति को समझने का अनूठा माध्यम बताया। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के अनुसार, फिल्में और विज्ञापन अपने समय का आईना होते हैं, इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है। महोत्सव के तहत आगे भी विभिन्न प्रदर्शनियां और चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
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