हौसले से हारी बीमारी, गंभीर बीमारी में बनाई 850 पेंटिंग
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जब कला किसी के दर्द की दवा बन जाए तो वह जी उठता है। कुछ ऐसा ही चेन्नई के पेंटर आर. उदयाकुमार के साथ भी है। स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी से पीड़ित ये पेंटर एक बार में एक सेंटीमीटर से ज्यादा कूची का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।
अपने जज्बे के बल पर अब तक 850 पेंटिंग बना चुके हैं। इनकी बनाई पेंटिंग की प्रदर्शनी सेक्टर-44 के आर्ट लाइफ गैलरी में आगामी 18 मार्च से लगेगी। आर. उदयाकुमार (38) प्रख्यात भौतिक विज्ञानी और लेखक स्टीफन हॉकिंग से प्रभावित हैं। वजह, उनकी और स्टीफन हॉकिंग की बीमारी में समानता का होना है।
उनका कहना है कि गंभीर बीमारी के बावजूद हॉकिंग नामी भौतिक विज्ञानी और लेखक बने। लिहाजा उन्होंने भी बतौर गेस्ट फैकल्टी दो साल तक एसआरएम यूनिवर्सिटी रामापुरम में काम किया। उनके पिता उन्हें एक बैटरी चालित व्हीलचेयर पर ले जाते थे।
मध्यम परिवार में जन्में उदयाकुमार 10 माह की उम्र में ही बीमारी से पीड़ित हो गए। धीरे-धीरे बीमारी ने उन्हें इतना जकड़ लिया कि इनका चलना-फिरना और उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया।
टीवी देखकर मूवमेंट समझने का काम
बावजूद इसके इन्होंने 10वीं की परीक्षा सेंट जॉन्स स्कूल विलीवक्कम से पास की। बीमारी बढ़ने की वजह से 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। लेकिन पेंटिंग के प्रति इनकी दीवानगी बनी रही।
सेक्टर-44 स्थित द आर्ट लाइफ गैलरी नोएडा की डायरेक्टर और को-प्रोमोटर प्रतिभा अग्रवाल का कहना है कि प्रत्येक पेंटिंग में इनकी कला का दर्शन होता है, जो कि परिजनों के सहयोग से बनाई गई है। भोपाल गैस त्रासदी पर भी इन्होंने बेहतरीन पेंटिंग बनाई है।
प्रतिभा कहती हैं कि उदयाकुमार अपने दाहिने हाथ के अंगूठे और अंगुलियों से पेंट करते हैं। खास बात यह कि इनकी कूची एक बार में 1 सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं घूम पाती। लिहाजा इनके पिता या माता कैनवास को अपने हाथों से पकड़कर इनके सुविधा के मुताबिक घुमाते हैं ताकि यह उनमें रंग भर सकें।
बीमारी की वजह से यह खुद तो अपने पैरों पर नहीं चल पाए। लेकिन यह टीवी देखकर मूवमेंट को समझने का काम करते हैं। टीवी से इनकी कई और जिज्ञासाओं का समाधान होता है। इनकी पेंटिंग पूरी तरह से चिंतन पर आधारित है। टीवी देखने से बढ़े हुए ज्ञान का इस्तेमाल भी होता है।
डैफोडिल्स को कैनवस पर लाना ख्वाब
जॉन मिल्टन की लिखी पैराडाइज लॉस्ट और विलियम वर्ड्सवर्थ की डैफोडिल्स इनकी पसंदीदा किताबें हैं। भविष्य में यह डैफोडिल्स को खुद के अंदाज में कैनवास पर उकेरना चाहते हैं। इनको विमानन, ऐरोनॉटिक इंजीनियरिंग, राजनीति और सामान्य ज्ञान में दिलचस्पी है।