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Delhi: पीडब्ल्यूडी में 200 करोड़ का फर्जीवाड़ा, सेवानिवृत अधिकारी समेत तीन गिरफ्तार

Sat, 27 Jul 2024 07:06 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 27 Jul 2024 07:06 AM IST
सार

काेरोना काल के दौरान लोक निर्माण विभाग में 200 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत अधिकारी अनिल कुमार आहूजा और दो फर्म एवी इंटरप्राइसेस के मालिक विनय कुमार, विवेक एसोसिएटस के मालिक अक्षित बिरमानी को गिरफ्तार किया है।

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Fraud of Rs 200 crore in PWD three including retired officer arrested
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली सरकार के अधिकारियों का निजी फर्मों के साथ सांठगांठ कर करोड़ों के घोटाले का एक और मामला सामने आया है। काेरोना काल के दौरान लोक निर्माण विभाग में 200 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत अधिकारी अनिल कुमार आहूजा और दो फर्म एवी इंटरप्राइसेस के मालिक विनय कुमार, विवेक एसोसिएटस के मालिक अक्षित बिरमानी को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि इन दो फर्मों को कोरोना काल में दिल्ली सरकार के आठ अस्पतालों में विभिन्न कार्यों का ठेका नियमों को ताक पर रख कर दिया गया। उन्हें बिना काम किए रुपयों का भुगतान भी कर दिया गया।

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एसीबी के संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा के अनुसार, जांच के दौरान एसीबी ने महामारी के दौरान विभिन्न निजी फर्मों को दिए गए दिल्ली सरकार के अस्पतालों में विभिन्न कार्यों की व्यापक जांच की गई। इन निजी फर्मों के साथ मिलीभगत करके संबंधित पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की ओर से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, और सरकारी धन का गबन पाया गया है। इसमें पाया गया कि पीडब्ल्यूडी के स्वास्थ्य सेवा के तत्कालीन मुख्य अभियंता अनिल कुमार आहूजा 10 फर्मों को दिए गए 56 कार्यों को बिना जांच पड़ताल के मंजूरी दी। इन कार्यों से संबंधित कई प्रमाणपत्र फाइल से गायब पाए गए। कार्य को निष्पादित करने के लिए खरीदी गई सामग्री के लिए ई-वे बिल (परिवहन बिल) भी नहीं मिली। फर्मों ने कार्य पूरा होने के 4-6 महीने बाद सामग्री खरीद के बिल जारी किए।
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यह भी पता चला कि खरीद वाउचर की जांच करने पर पता चला कि वाउचर जारी करने वाली कुछ कंपनियां और फर्म अस्तित्व में ही नहीं हैं। निविदा शर्तों और जीएसटी मानदंडों में भी अनियमितता पाई गई। अधिकारी ने बताया कि कुछ मामलों में स्पॉट कोटेशन बुलाना, बोलियों की तुलना करना और निविदाएं प्रदान करना एक ही दिन में कर दिया गया, जो एक ही दिन में संभव ही नहीं है। खासकर जब देश लॉकडाउन लगा था।
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1.25 करोड़ के लेन देन हुए अधिकारी के बीच
अधिकारी ने बताया कि जांच में पता चला कि तत्कालीन मुख्य अभियंता अनिल कुमार आहूजा और मेसर्स एवी एंटरप्राइजेज के बीच लगभग 1.25 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन हुआ है। साथ ही एवी एंटरप्राइजेज ने अनिल कुमार आहूजा की बहू के खाते में पांच दिसंबर 2020 को 6,00,000 रुपये की राशि भी हस्तांतरित की थी। इस मामले में पूरी साजिश का पता लगाने और इसमें शामिल सभी सरकारी अधिकारियों और निजी फर्मों की भूमिका के लिए जांचने के लिए व्यापक जांच चल रही है। शेष दोषी पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए एसीबी ने प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी को भेजा है।

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