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सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाले दो धरे, 50 से ज्यादा युवकों को बना चुके है शिकार 

Wed, 25 Sep 2019 05:35 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Wed, 25 Sep 2019 05:35 AM IST
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fraud in name of government job   
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर दो जालसाज को गिरफ्तार किया है। आरोपी दूरदर्शन व प्रसार भारती में नौकरी लगवाने का झांसा देते थे। आरोपी 50 से ज्यादा बेरोजगार युवकों के साथ ठगी कर चुके हैं।
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आरोपी बिहार, पूर्वी यूपी, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र के दूरस्थ इलाकों के बेरोजगार युवकों के साथ ठगी करते थे। इनके पास से फर्जी पहचान पत्र, चुनाव पहचान पत्र, आधार कार्ड व पैन कार्ड बरामद किए गए हैं। अपराध शाखा के डीसीपी राजेश देव के अनुसार, प्रसार भारती, दूरदर्शन के अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश माहूर ने अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी।
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उन्होंने कहा था कि कुछ युवकों ने शिकायत की है कि दूरदर्शन की वेबसाइट में नौकरी के विज्ञापन देकर किसी ने उनसे ठगी की है। फर्जी वेबसाइट पर दूरदर्शन व प्रसार भारती के लोगो का इस्तेमाल किया गया है। मामला दर्ज कर एसीपी जसबीर सिंह के नेतृत्व में टीम ने जांच शुरू की। पुलिस टीम ने वेबसाइट में दिए गए मोबाइल नंबर, बैंक खाते और तकनीकी रूप से जांच शुरू की।
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टीम को जांच में पता लगा कि आरोपी खोड़ा कॉलोनी (गाजियाबाद) से गिरोह को चला रहे हैं। वह पैसे निकालने के लिए कई एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच के बाद पुलिस टीम ने दो आरोपियों बिहार निवासी रोहित मिश्रा उर्फ मोनू और आशीष सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

रोहित मिश्रा ने बताया कि वह तीन वर्ष से बेरोजगार युवकों को ठग रहा है। वह साथी आशीष सिंह के साथ दूरदर्शन की फर्जी वेबसाइट चला रहा था। रोहित ने बताया कि पहले वह विज्ञापन एजेंसी में काम करता था। वह ग्राहक से कागजात व पेमेंट एकत्रित करता था। इस दौरान वह कुछ जालसाज के संपर्क में आया। ये जालसाज नौकरी लगवाने व मोबाइल टॉवर लगवाने का विज्ञापन देते थे। इसके बाद इसने बेरोजगार युवकों को ठगने वाला गिरोह चलाना शुरू किया।

समाचार पत्रों में देते थे विज्ञापन

आरोपी बिहार, पूर्वी यूपी, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश समेत दिल्ली-एनसीआर के समाचार पत्रों में सरकारी नौकरी लगवाने का विज्ञापन देते थे। विज्ञापन में ये मोबाइल नंबर भी देते थे। रोहित ने बताया कि एक फर्जी वेबसाइट बना रखी थी और उस पर दूरदर्शन का लोगो लगा रखा था।

जब कोई पीड़ित संपर्क करता था तो वह उसके घर का पता ले लेता था और तुरंत उसके घर पर चार पेज का फॉर्म भेज देता था। पीड़ित से 15540 रुपये जमा करा लेता था। पेमेंट आने के बाद पीड़ित को मेसेज भेजता था कि उसका रजिस्ट्रेशन पूरा हो गया है। इसके बाद पीड़ित को मेडिकल व इंश्योरेंस के 15 हजार व कोर्ट फीस के पांच हजार रुपये जमा कराने के लिए कहता था।


इसके बाद ये दूरदर्शन में नौकरी लगने का फर्जी नियुक्ति पत्र देता था। पीड़ित जब नियुक्ति पत्र लेकर दूरदर्शन पहुंचे तो इसका खुलासा हुआ। आरोपियों ने फर्जी कागजातों से बैंक खाते खोल रखे थे।
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