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शिविर आयोजन के लिए आए सरकारी बजट का दुरुपयोग
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 12 Feb 2016 05:53 PM IST
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आयुर्वेद भारतीय संस्कृति की प्राचीन रोगरोधक पद्धति हैं। जो न केवल रोग को जड से खत्म कर देती है बल्कि उसकी रोग रोधक क्षमता को भी बढाती हैं। लेकिन आधुनिक युग में लोगों में अंग्रेजी दवाईयों को लेकर एक होड-सी मची हुई है।
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जो एक रोग को तो ठीक कर देती है, लेकिन रोगी को दूसरा रोग लगा देती हैं। ये बातें शुक्रवार को आयूष विभाग हरियाणा द्वारा नूंह की श्री राधा कृष्ण गोपाल गौशाला के प्रांगण में आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर के नोडल आफीसर डा. शशांक ने लोगों को संबोधित करते हुए कही।
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शिविर में केवल वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें जरूरी औषधियां भी निशुल्क वितरित की गई। शिविर का शुभारंभ गौशाला के संस्थापक शंकर मुनी माहाराज व समाजसेवी नरेंद्र पटेल ने किया।
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शिविर में वरिष्ठ नागरिकों में खून की मात्रा, यूरीन शूगर, ब्लड ग्रुप जैसी जांच की गई और उन्हें खान-पान संबंधित हिदायतें दी गई। योग विशेषज्ञ डा. रामअवतार ने बुजुर्गों को योग सिखाते हुए उसकी जरूरत और उपयोगिता के बारे में बताया।
शिविर में करीब 500 लोगों ने अपना पंजीकरण कराते हुए स्वास्थ्य जांच कराई। राधाकृष्ण गोपाल गौशाला के संस्थापक शंकर मुनि महाराज ने कहा कि बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं। आयुर्वेदिक औषधियां, वृद्धों के लिए योगायास के साथ-साथ आहार, विहार एवं स्वस्थ जीवन शैली पर उन्हें परामर्श दिया गया।
फर्जी पंजीकरण-
स्वास्थ्य जांच शिविर के नाम पर आयुष विभाग द्वारा खानापूर्ति की गई, जिससे न केवल सरकारी धनराशि का दुरुपयोग हुआ साथ ही सरकार की महत्वकांक्षी योजना भी धरी की धरी रह गई। प्रदेश सरकार आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार को लेकर काफी गंभीर दिखाई दे रही है, लेकिन नूंह में आयोजित शिविर ने सरकार की गंभीरता की जमकर धज्जियां उडाई।
शिविर में मरीजों की संया 550 बताई गई, जबकि आधे से ज्यादा पंजीकरण फर्जी किए गए। ओपीडी रजिस्टर में मरीजों की संख्या अधिक दिखाने के लिए फर्जी तरीके से उनके नाम लिखे गए। मरीजों का कोई पता उपलब्ध नहीं था तो नोडल अफसर से पूछा गया तो वे भी रजिस्टर में हुए पंजीकरण पर कुछ भी बोल पाने में असमर्थ दिखे। साथ ही करीब 2 बजे ही शिविर का समापन कर दिया गया।
इस मौके पर भाजपा नेताओं ने खूब फोटो खिचवाएं, लेकिन सरकारी पैसे का कैसा दुरुपयोग यहां हुआ, इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। शिविर में डा. मनोज, नसीम रजा, राजबीर, रविंद्र, सोनिया, सुनीता, आशा, अर्चना, नरेंद्र पटेल, सुरेश बघेल, बीरपाल कालियाका, श्रीपाल शर्मा, ज्ञानचंद आर्य आदि मौजूद थे।