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केजरीवाल सरकार के चार वर्ष: इन चार बड़े विवादों से गरमाई रही राजनीति
Thu, 14 Feb 2019 02:44 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 14 Feb 2019 02:44 AM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली सरकार की केंद्र और उपराज्यपाल से तीखी तकरार रही। मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों के साथ राजनिवास में धरने पर बैठे। नौकरशाही से भी मुख्यमंत्री ने दो-दो हाथ किए। तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ सीएम आवास में मध्य रात्रि को हुई कथित मारपीट में तो नौकरशाही विरोध प्रदर्शन पर उतर आई थी। मुख्यमंत्री को दिल्ली पुलिस की पूछताछ से भी गुजरना पड़ा।
14 फरवरी 2015 को गठन के बाद से ही अरविंद केजरीवाल की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा के खिलाफ आक्रामक रही। पहला बड़ा टकराव 21 मई, 2015 की केंद्र सरकार की अधिसूचना से हुआ, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में नौकरशाहों की नियुक्ति के सारे अधिकार उपराज्यपाल को सौंप दिए गए थे। हालांकि, इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार पर संवैधानिक स्थिति स्पष्ट की थी कि उपराज्यपाल का अधिकार सर्विस, जमीन व पुलिस पर है, जबकि दूसरे मामलों में दिल्ली सरकार अपने स्तर पर काम करेगी।
बीते साल 19 और 20 फरवरी की मध्यरात्रि का मामला सनसनीखेज रहा। तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने कहा कि सीएम ने उन्हें अपने घर बैठक के लिए बुलाया। इसमें उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 11 आप विधायक मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान आप विधायकों ने बात न मानने पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। अंशु प्रकाश की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री से घंटों पूछताछ की और कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में केजरीवाल तक को आरोपी बनाया है। पूरा मामला अब तक अदालत में लंबित है। उधर, इससे नाराज दिल्ली के नौकरशाहों ने एलान किया कि वह मुख्यमंत्री से सुरक्षा का भरोसा मिले बगैर उनकी किसी भी बैठक का हिस्सा नहीं होंगे। अधिकारियों ने सचिवालय में काली पट्टी बांधकर काम किया।
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बीते साल जून के पहले पखवाड़े में उपराज्यपाल से मुलाकात करने पहुंचे सीएम अपने तीन मंत्रियों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए। केजरीवाल केजरीवाल की मांग थी कि आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराएं, काम रोकने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो और राशन की घर पर आपूर्ति की योजना को मंजूर किया जाए। बाद में आप प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने निकली। इसके बाद मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ बाहर निकले।
इससे पूर्व, दिसंबर 2015 में सीएम के सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर सीबीआई की छापेमारी से भी राजनीति गरमा गई थी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। यह मामला भी अभी अदालत में लंबित है।
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14 फरवरी 2015 को गठन के बाद से ही अरविंद केजरीवाल की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा के खिलाफ आक्रामक रही। पहला बड़ा टकराव 21 मई, 2015 की केंद्र सरकार की अधिसूचना से हुआ, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में नौकरशाहों की नियुक्ति के सारे अधिकार उपराज्यपाल को सौंप दिए गए थे। हालांकि, इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार पर संवैधानिक स्थिति स्पष्ट की थी कि उपराज्यपाल का अधिकार सर्विस, जमीन व पुलिस पर है, जबकि दूसरे मामलों में दिल्ली सरकार अपने स्तर पर काम करेगी।
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बीते साल 19 और 20 फरवरी की मध्यरात्रि का मामला सनसनीखेज रहा। तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने कहा कि सीएम ने उन्हें अपने घर बैठक के लिए बुलाया। इसमें उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 11 आप विधायक मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान आप विधायकों ने बात न मानने पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। अंशु प्रकाश की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री से घंटों पूछताछ की और कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में केजरीवाल तक को आरोपी बनाया है। पूरा मामला अब तक अदालत में लंबित है। उधर, इससे नाराज दिल्ली के नौकरशाहों ने एलान किया कि वह मुख्यमंत्री से सुरक्षा का भरोसा मिले बगैर उनकी किसी भी बैठक का हिस्सा नहीं होंगे। अधिकारियों ने सचिवालय में काली पट्टी बांधकर काम किया।
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बीते साल जून के पहले पखवाड़े में उपराज्यपाल से मुलाकात करने पहुंचे सीएम अपने तीन मंत्रियों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए। केजरीवाल केजरीवाल की मांग थी कि आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराएं, काम रोकने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो और राशन की घर पर आपूर्ति की योजना को मंजूर किया जाए। बाद में आप प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने निकली। इसके बाद मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ बाहर निकले।
इससे पूर्व, दिसंबर 2015 में सीएम के सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर सीबीआई की छापेमारी से भी राजनीति गरमा गई थी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। यह मामला भी अभी अदालत में लंबित है।