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खतरे में खाकी, 10 महीने में चार की हत्या
Updated Tue, 14 Oct 2014 05:06 PM IST
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दिल्ली में बदमाशों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। आलम यह है कि अब बदमाशों को नहीं पुलिस को खुद की सुरक्षा करने की जरूरत पड़ रही है।
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बीते कुछ महीनों में हुई घटनाओं पर नजर डालें तो ऐसा ही मालूम होता है कि बदमाशों को पुलिस का जरा भी खौफ नहीं है। बेखौफ बदमाशों ने दो पुलिस कर्मियों पर हमला बोल दिया जिसमें एक की मौत हो गई जबकि दूसरा अभी भी जिंदगी और मौत से लड़ रहा है।
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राजधानी की पुलिस लगातार बदमाशों के निशाने पर है। अगर आंकडों पर गौर करें तो इस साल हुए हमलों में चार पुलिसकर्मी अपनी जान गवां चुके हैं।
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अब तक हुई घटनाओं पर एक नजर
12 अक्टूबर 2014: द्वारका में दो पुलिसवालों पर हमला, एक की मौत, दूसरा जख्मी।
27 सितंबर 2014: जाफराबाद में कांस्टेबल की हत्या।
14 जुलाई 2014: ज्योति नगर में घर के बाहर कांस्टेबल की हत्या।
14 जून 2014: मोतीनगर में ट्रैफिक पुलिसकर्मी को सड़क पर मारा।
02 जून 2014: मालवीय नगर में एक कांस्टेबल की हत्या।
06 मई 2014: गश्त के के दौरान दो पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला।
21 अप्रैल 2014: रोहिणी में एक हेड कांस्टेबल की पिटाई।
पुलिसकर्मियों पर लगातार हो रहे हमलों से राजधानी में सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आगे यह समस्या और बड़ी होने वाली है।
27 सितंबर 2014: जाफराबाद में कांस्टेबल की हत्या।
14 जुलाई 2014: ज्योति नगर में घर के बाहर कांस्टेबल की हत्या।
14 जून 2014: मोतीनगर में ट्रैफिक पुलिसकर्मी को सड़क पर मारा।
02 जून 2014: मालवीय नगर में एक कांस्टेबल की हत्या।
06 मई 2014: गश्त के के दौरान दो पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला।
21 अप्रैल 2014: रोहिणी में एक हेड कांस्टेबल की पिटाई।
पुलिसकर्मियों पर लगातार हो रहे हमलों से राजधानी में सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आगे यह समस्या और बड़ी होने वाली है।