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दिल्ली के डॉक्टरों ने की 10 साल के मासूम की सफल बाईपास सर्जरी

Wed, 30 Mar 2016 03:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 30 Mar 2016 03:05 PM IST
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fortis hospital doctors does bypass surgery of 10 year old boy
बाईपास सर्जरी - फोटो : अमर उजाला

हृदय संबंधी बीमारी होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) से पीड़ित 10 वर्षीय बच्चे की दिल्ली के फोर्टिज अस्पताल में सफल बाईपास सर्जरी की गई है।

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सर्जरी करने वाले चिकित्सकों का दावा है कि भारत में पहली बार इतनी कम उम्र के किसी बच्चे की सफल बाईपास सर्जरी की गई है। मरीज एचओएफएच संबंधी अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है, इसी वजह से परिवार के दूसरे सदस्यों की भी स्वास्थ्य जांच करने का निर्णय लिया गया है।
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उत्तर प्रदेश के मथुरा का रहने वाला 10 वर्षीय धर्मेंद्र जन्म के बाद से ही हृदय संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित था और उसे हृदयाघात भी हुआ था। लेकिन इसकी जानकारी काफी देर से हुई।

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उसके हृदय की धमनियां 90 फीसदी तक बंद हैं

fortis hospital doctors does bypass surgery of 10 year old boy
बाईपास सर्जरी - फोटो : अमर उजाला

तीन दिनों तक लगातार सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ के बाद उसे इलाज के लिए 11 मार्च को अस्पताल लाया गया। चिकित्सीय जांच में पता चला कि धर्मेंद्र दुर्लभ कोलेस्ट्रॉल संबंधी बीमारी एचओएफएच से पीड़ित है और उसके हृदय की धमनियां 90 फीसदी तक बंद हैं।

इस वजह से धर्मेंद्र का हृदय 40 से 50 फीसदी ही काम कर पा रहा था और हृदय का आकार एक वयस्क की तरह से विकसित हो गया था।

फोर्टिज अस्पताल के कार्डियो थोरासिक वैस्क्यूलर सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. रामजी मेहरोत्रा ने बताया कि मरीज की हालत बेहद खराब थी। लिहाजा फौरन एंजियोग्राफी करने का निर्णय लिया गया।

धर्मेंद्र की 15 मार्च को सफल सर्जरी की गई

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इसके बाद 15 मार्च को कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) सर्जरी की गई। डॉ. मेहरोत्रा ने कहा कि इतनी कम उम्र के मरीज की जब बाईपास सर्जरी की जाती है तब उस दौरान हृदय के सपोर्ट के लिए कोई मशीन उपलब्ध नहीं होती, यह एक बड़ी चुनौती थी।

यही नहीं मरीज की उम्र 10 वर्ष थी लिहाजा ग्राफ्ट्स चुनने की चुनौती थी जो लंबे समय तक चल सके। कम उम्र होने की वजह से पतली नसों को जोड़ने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। धर्मेंद्र की 15 मार्च को सफल सर्जरी की गई।

फोर्टिज एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ ने कहा कि इस मरीज में रक्त प्रवाह को प्रभावित करने वाली घातक स्थिति फैमलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया की वजह से हुई थी। यह दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आती है। एचओएफएच का मामला 10 लाख में से एक में देखने को मिलता है। 

नौ से 11 वर्ष के बच्चे की लिपिड जांच हो
कम उम्र में बच्चों को हो रही बीमारियों को देखते हुए शुरुआती स्तर पर ही लिपिड जांच कराई जानी चाहिए। सभी बच्चों को नौ से 11 वर्ष की उम्र में कम से कम एक बार कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। यदि परिवार के किसी सदस्य में हृदय रोग है या कोलेस्ट्रॉल का स्तर 240 एमजी/डीएल से अधिक है तो 2 वर्ष के बच्चे का फास्टिंग लिपिड प्रोफाइल जांच जरूर करानी चाहिए।

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