पंचायत चुनावः दूसरी शादी कर पूरा किया बाप का अरमान
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बाप के अरमानों पर पानी फिरता देख बेटे ने पढ़ी लिखी लड़की से शादी कर ली है। घर में पढ़ी लिखी बहू के आने से परिजनों में खुशी का माहौल है, वहीं समर्थकों में भी खुशी देखी जा रही है।
बता दें कि वर्ष 2010 में गांव भंगोह निवासी नंबरदार समसूदीन दो वोट से चुनाव हार गए थे। सरपंच का चुनाव हारने के कुछ महीने बाद से ही वह अपनी जमीन पर पकड़ बनाने के लिए जी-जान से जुटे हुए थे।
लेकिन उन्हें उस समय गहरा झटका लगा, जब ग्राम पंचायत की सरपंच सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित हो गई और साथ ही शैक्षणिक योग्यता का फरमान भी जारी कर दिया गया।
बाप की चुनावी जमीन बचाने को मजबूर हुआ बेटा
परिवार में कोई भी पढ़ी, लिखी महिला न होने के कारण उनकी और उनके समर्थकों की बेचैनी बढ़ गई। समसूदीन का 21 वर्षीय बेटा तालिम रबी की शिक्षा ग्रहण कर रहा है और वह अभी शादी नहीं करना चाहता था। लेकिन बाप की चुनावी जमीन को बचाने के लिए बेटे ने परिजनों को पढ़ी-लिखी बहू से शादी रचाने की इजाजत दे दी।
परिजनों ने भी बिना देर किए चुनावी इच्छा को पूरा करने के लिए जिला भरतपुर राजस्थान के गांव बिलोंद से बेटे की आठवीं पास लड़की साजिदा से शादी करा दी और अब नई बहू ने सरपंच पद के लिए अपनी ताल ठोक दी है।
ग्रामीण अरसद, तैयब, इसलाम,कयूम, इसब, छुटटन, असरा आदि ने बताया कि गांव में शिक्षित सरपंच के बनने से विकास कार्यों को बल मिलेगा और पुराने मतभेद भी दूर होंगे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी आएगी तो नए सुधार भी होंगे।
गांव की स्थिति
गांव भंगोह अरावली के दामन में बसा है। इसकी आबादी करीब 2500 है। इसमें 900 वोटों पर कुल आठ वार्ड है। वर्ष 2010 में गठित पंचायत के निवर्तमान सरपंच इशाक सहित कई पंच अनपढ़ थे। इस दफा पूरी पंचायत शिक्षित होने के साथ युवा पीढ़ी के भी नजर आने की पूरी संभावना है। युवा वर्ग भी इससे काफी उत्साहित नजर आ रहा है।