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Delhi NCR News: फुटपाथ पवित्र और सुरक्षित स्थान...वाहनों के आवागमन के लिए नहीं
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फुटपाथ पर बैठे नाई के ट्रक की टक्कर से घायल होने के मामले में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, बढ़ाया मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि फुटपाथ पवित्र और सुरक्षित स्थान हैं, जो वाहनों के आवागमन के लिए नहीं बने हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि फुटपाथ पर काम करने वाले व्यक्ति को केवल इस आधार पर ‘सहयोगी लापरवाही’ का दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि वह वहां अनधिकृत रूप से मौजूद था। न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने 19 अगस्त को यह फैसला सुनाते हुए सड़क हादसे में घायल नाई के मुआवजे में वृद्धि कर दी।
मामला सितंबर 2019 का है। आनंद औद्योगिक क्षेत्र में फुटपाथ पर कुर्सी लगाकर नाई का काम करने वाले व्यक्ति को लापरवाही से चलाए जा रहे ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 2022 में सहयोगी लापरवाही मानते हुए मुआवजे में 30 प्रतिशत की कटौती की थी।हाईकोर्ट ने एमएसीटी के इस फैसले को रद्द कर दिया और बीमा कंपनी को पीड़ित को 1.71 लाख रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।
फुटपाथ पर काम करने को नहीं माना जा सकता सहयोगी लापरवाही
अदालत ने कहा कि फुटपाथ पर कुर्सी लगाकर काम करना नगरपालिका कार्रवाई या नागरिक जिम्मेदारी का विषय हो सकता है, लेकिन इसे सड़क हादसे में सहयोगी लापरवाही नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि सहयोगी लापरवाही तभी मानी जाएगी, जब घायल व्यक्ति ने स्वयं दुर्घटना में योगदान दिया हो। वाहन का फुटपाथ पर चढ़ना या वहां मौजूद व्यक्ति को टक्कर मारना ही हादसे का मूल कारण था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि फुटपाथ पवित्र और सुरक्षित स्थान हैं, जो वाहनों के आवागमन के लिए नहीं बने हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि फुटपाथ पर काम करने वाले व्यक्ति को केवल इस आधार पर ‘सहयोगी लापरवाही’ का दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि वह वहां अनधिकृत रूप से मौजूद था। न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने 19 अगस्त को यह फैसला सुनाते हुए सड़क हादसे में घायल नाई के मुआवजे में वृद्धि कर दी।
मामला सितंबर 2019 का है। आनंद औद्योगिक क्षेत्र में फुटपाथ पर कुर्सी लगाकर नाई का काम करने वाले व्यक्ति को लापरवाही से चलाए जा रहे ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 2022 में सहयोगी लापरवाही मानते हुए मुआवजे में 30 प्रतिशत की कटौती की थी।हाईकोर्ट ने एमएसीटी के इस फैसले को रद्द कर दिया और बीमा कंपनी को पीड़ित को 1.71 लाख रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।
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फुटपाथ पर काम करने को नहीं माना जा सकता सहयोगी लापरवाही
अदालत ने कहा कि फुटपाथ पर कुर्सी लगाकर काम करना नगरपालिका कार्रवाई या नागरिक जिम्मेदारी का विषय हो सकता है, लेकिन इसे सड़क हादसे में सहयोगी लापरवाही नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि सहयोगी लापरवाही तभी मानी जाएगी, जब घायल व्यक्ति ने स्वयं दुर्घटना में योगदान दिया हो। वाहन का फुटपाथ पर चढ़ना या वहां मौजूद व्यक्ति को टक्कर मारना ही हादसे का मूल कारण था।
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