इस वजह से परेशान हो कर 5 वर्षीय मासूम ने खटखटाया NGT का दरवाजा
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रोहिणी सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशन के शोर से परेशान एक पांच वर्षीय बच्ची ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाया है।
वहीं एनजीटी ने याचिका पर गौर करने के बाद दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को तय पर्यावरणीय नियमों का पालन और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने का आदेश दिया है।
पांच वर्षीय बच्ची का नाम समृद्धि गोस्वामी है। उनके पिता रमेश गोस्वामी का कहना है कि दिल्ली मेट्रो समेत कई प्राधिकरणों के पास गुहार लगाने का भी कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद वे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहुंचे।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को संबंधित याचिका पर सुनवाई की। याची की ओर से पेश एडवोकेट सालिक शफीक ने रोहिणी सेक्टर 18 और 19 मेट्रो स्टेशन को वैकल्पिक जगह पर स्थानांतरित करने की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन पर ध्वनि मानक 85 डेसिबल से ऊपर रिकॉर्ड किया जा चुका है। यह घातक है। रोहिणी सेक्टर 18 मेट्रो के निर्माण और संचालन के दौरान पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया गया। मेट्रो के इर्द-गिर्द साउंड बैरियर लगने चाहिए।
वहीं भुक्तभोगी लोगों को हर्जाना भी मेट्रो की ओर से दिया जाना चाहिए। दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने अगस्त 2011 में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट में कहा था कि ध्वनि प्रदूषण से सेहत को कोई नुकसान नहीं है हालांकि यह स्लीप डिसऑर्डर, तनाव, उच्च रक्तचाप और घबराहट का कारण हो सकता है।