जिस इमारत पर गिरा बिल्डिंग का मलबा उसमें रहने वाले परिवारों में दहशत, दिल्ली में 8 साल में 8 हादसे
जमींदोज हुई बिल्डिंग का मलबा सामने वाली इमारत पर भी गिरा था। हादसे में इस इमारत के एक हिस्से को काफी क्षति पहुंची है। ऊपरी फ्लोर से नीचे जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सीढ़ी लगभग नष्ट हो गई है। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बिल्डिंग में रहने वाले करीब डेढ़ दर्जन लोगों को पड़ोस के मकानों की छत के सहारे नीचे उतारा। हादसे के बाद से सी-26 में रहने वाले सभी परिवार बुरी तरह दहशत में हैं। इनमें से ज्यादातर पड़ोसियों के यहां रुके हुए हैं या अपने-अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। बुधवार देर रात तक वहां से मलबा हटाने का काम जारी था।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सी-26 का मालिक यामीन परिवार के साथ बुनकर कॉलोनी, भारत नगर में रहता है। उसने ग्राउंड के अलावा ऊपर तीन मंजिल बनाई हुई हैं। ये सभी किराए पर हैं। पहली मंजिल पर रहने वाली अमनदीप ने बताया कि वह बाहर की ओर अपनी पोती को नहला रही थीं। वह तौलिया लेने भीतर गईं तो लगा, भूकंप आ गया है। इस दौरान उनके घर में धूल ही धूल भर गई। उन्होंने बाहर की ओर देखा तो सामने वाली बिल्डिंग गिरी दिखी। अमनदीप कौर ने बताया कि घटना से वह बुरी तरह डर गईं। पड़ोसियों ने उन्हें किसी तरह बाहर निकाला। बाद में अन्य लोगों को भी निकाला गया। अमनदीप ने बताया कि मलबा गिरने से उनकी इमारत भी शायद कमजोर हो गई है।
धर्मेंद्र की पहुंच के चलते नहीं हुई कार्रवाई
एक पड़ोसी ने बताया कि शिव कुमार और बिल्डर धर्मेंद्र के बीच विवाद चल रहा था। शिव कुमार या तो सारी बिल्डिंग खरीदने या फिर बेचने के लिए कहता था, लेकिन धर्मेंद्र तैयार नहीं था। यही वजह थी कि शिव कुमार लगातार इमारत को खतरनाक घोषित कराने के लिए एमसीडी पर दबाव बना रहा था। पड़ोसियों का कहना है कि धर्मेंद्र की ऊंची पहुंच के चलते एमसीडी के अधिकारी जान-बूझकर कार्रवाई नहीं कर रहे थे। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है।
सिलसिला बन गए हैं हादसे
महिला ने जमकर किया हंगामा
पास में ही रहने वाली एक महिला नजमा ने हादसे के बाद मौके पर खूब हंगामा किया। उसका कहना था कि मलबे में उसका बेटा अफसर (10) दब गया है। घटनास्थल पर महिला काफी देर रोती रही। उसने सभी अस्पतालों के चक्कर भी लगाए। महिला का दावा था कि उसका बेटा उसी शीशम के पेड़ के नीचे अन्य बच्चों के साथ खेलता था। हालांकि शाम होते-होते उसका बच्चा मिल गया। शाम 7 बजे उसका बच्चा एक पार्क में मिला। बच्चे का कहना है कि कोई उसे बहला-फुसलाकर ले गया था।
2010 से अबतक हुए दिल्ली में हादसे
26 सिंतबर 2018 : अशोक विहार के सावन पार्क में पांच मंजिला इमारत गिरी। हादसे में सात की मौत, छह घायल।
1 जुलाई 2017 : लक्ष्मीनगर में तीन मंजिला इमारत गिरी, पांच लोग घायल।
16 जनवरी 2017 : पुरानी दिल्ली के चांदनी महल इलाके में 100 साल पुरानी इमारत गिरी। दंपती की मौत।
20 जुलाई 2015 : विष्णु गार्डन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरी। पांच लोग घायल।
28 जून 2014 : इंद्रलोक इलाके के तुलसी नगर में चार मंजिला इमारत गिरी। 10 की मौत, कई घायल।
9 अक्तूबर 2013 : सदर बाजार इलाके में दो मंजिला मकान गिरने से पिता-पुत्र की मौत।
12 दिसंबर 2012 : न्यू अशोक नगर इलाके में इमारत गिरने से पांच लोगों की मौत।
15 नवंबर 2010 : लक्ष्मीनगर के ललिता पार्क में चार मंजिला इमारत गिरी। हादसे में 70 से अधिक की मौत, 150 लोग घायल।