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खूनी बाघ: चिड़ियाघर हादसे की 6 अनसुनी बातें

Wed, 24 Sep 2014 02:22 PM IST
Updated Wed, 24 Sep 2014 02:22 PM IST
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five facts of delhi zoo incident.

चिड़ियाघर में मंगलवार को हुए दर्दनाक हादसे के लिए प्रशासन और दर्शक बराबर के जिम्मेदार हैं। हादसे से दोनों को ही सबक लेने की जरूरत है। यह कहना है कि वाइल्ड लाइफ के जानकार व विशेषज्ञ फैयाज खुदस्सर का।

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उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर में पले जानवर की प्रवृत्ति जंगली जानवरों की तरह नहीं होती। दर्शकों की हरकतें उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर देती हैं। उन्होंने कहा कि इस हादसे के लिए हम सीधे चिड़ियाघर प्रशासन को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते।
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हादसे के बाद चिड़ियाघर में क्या बदलाव हुए और अब तक कब-कब ऐसे हादसे हुए हैं, जानिए आगे की स्लाइड में:

दिमागी रूप से कमजोर था मकसूद

five facts of delhi zoo incident.

चिड़ियाघर में बाघ के हमले में मारा गया मकसूद दिमागी रूप से कमजोर था। उसका राममनोहर लोहिया अस्पताल में कई वर्षों से इलाज चल रहा था। वह इलाके में ही मजदूरी करता था। परिजनों को यह नहीं पता कि मकसूद चिड़ियाघर कैसे पहुंच गया। निजामुद्दीन थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार मकसूद के पिता महफूज ई-रिक्शा चलाते थे। ई-रिक्शा संचालन बंद होने के बाद से वह बेरोजगार हैं। महफूज ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि  मंगलवार सुबह मकसूद काम पर जाने की बात कहकर घर से निकला था। परिजनों का कहना है कि वह हमेशा परेशान रहता था और अजीब-अजीब सी बातें करता था।

पुलिस का कहना है कि चिड़ियाघर के गार्ड पंकज ने मकसूद को टोका था और फिर पीछे हटा दिया था, लेकिन कुछ देर बाद युवक बाघ के बाडे़ में कूद गया। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसके हिसाब से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘युवक ने की खुदकुशी की कोशिश’

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घटना के बाद चिड़ियाघर प्रशासन बचाव की मुद्रा में आ गया है। चिड़ियाघर के क्यूरेटर रियाज खान ने कहा कि युवक  ने बाड़े में कूदकर सुसाइड की कोशिश की। लेकिन सवाल उठता है अगर बाड़े के पास गार्ड तैनात रहता है तो युवक पहले बेरिकेड को पार कर बाड़े की दीवार तक कैसे पहुंचा?

अगर युवक वहां तक पहुंच भी गया तो उसे वापस क्यों नहीं निकाला गया? जब हादसा हुआ तो चिड़ियाघर प्रशासन ने उसे बचाने में इतनी देरी क्यों की?

दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि चिड़ियाघर के बाड़ों को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के तय मानकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। जानवरों के  सभी बाड़े विजिटर्स के लिए सुरक्षित हैं।

कोई भी दर्शक बाड़े की दीवार तक नहीं पहुंच सकता, जब तक कि वह पहले बेरिकेड को पार नहीं करता। युवक पहले बेरिकेड को पार कर बाड़े की दीवार के पास पहुंच गया। उसने बाड़े में छलांग लगा दी और बाघ के हमले से उसकी मौत हो गई।

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आराम के समय बाघ को परेशान किया

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वाइल्ड लाइफ के जानकार व विशेषज्ञ फैयाज खुदस्सर ने कहा कि चिड़ियाघर में बेहोश करने वाली गन व दवा मौजूद है, लेकिन उसका प्रयोग करने में 20 से 25 मिनट का समय लग जाता है। मगर इस मामले में प्रशासन को उतना समय ही नहीं मिला। हालांकि प्रशासन की गलती यह थी कि वहां तमाशा देख रही भीड़ को नहीं हटाया गया।

अगर उन्हें समय रहते हटा लिया जाता तो शायद बाघ युवक पर हमला नहीं करता, क्योंकि बाघ ने शोर होने व उस पर पत्थर फेंकने के कारण युवक पर हमला किया। फैयाज खुदस्सर ने कहा कि दर्शक अमूमन जानवरों को गुस्सा दिलाते हैं।

जब कोई दर्शक चिड़ियाघर जाता है तो वह चाहता है कि उसे सारे जानवर घूमते हुए मिलें, लेकिन दोपहर का समय उनके आराम का होता है। ऐसे में दर्शक शोर मचाते हैं और जानवरों को पत्थर मारते हैं, नतीजतन जानवर नाराज हो जाते है।

उन्होंने कहा कि जब युवक बाड़े में गिरा तो बाघ उसे खाने का सामान समझकर वहां पहुंचा, लेकिन तुरंत हमला नहीं किया। पत्थर मारने और शोर मचाने के कारण उसने हमला कर दिया।

दर्शकों के लिए बंद हुए चिड़ियाघर के दरवाजे

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सफेद बाघ के हमले से युवक की मौत के बाद प्रशासन ने हादसे वाली जगह को खाली कराने के साथ ही चिड़ियाघर में प्रवेश बंद कर दिया। सभी काउंटर पर टिकट की बिक्री बंद कर दी गई।

करीब एक बजे का समय था। चिड़ियाघर घूमने वालों की लंबी कतार लगी हुई थी। टिकट काउंटर पर लोग बारी का इंतजार कर रहे थे। हादसे की खबर आते ही काउंटर तो बंद कर दिए गए, लेकिन किसी को कारण नहीं बताया गया।

नतीजा, 1 बजे काउंटर बंद होने के बाद भी लोग काउंटर खुलने का 2 बजे तक इंतजार करते रहे। 3 बजे सूचना दी गई की आज चिड़ियाघर नहीं खुलेगा।

रोमांच जगा देता है सफेद बाघ

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सफेद बाघ, यह नाम ही उत्सुकता और रोमांच जगा देता है। बहुत ही कम पाए जाने वाले बिल्ली जाति के इस बाघ को पालकर इनकी संख्या सफलतापूर्वक बढ़ाई गई है और इस जीन को नष्टप्राय: होने से बचाया गया है।

वर्ष 1951 में सबसे पहले सफेद बाघ मोहन मध्यप्रदेश के रीवा रियासत के जंगल में से पकड़ा गया था। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में सफेद बाघ का प्रजनन सफलतापूर्वक हुआ है। दिल्ली चिड़ियाघर में भी मोहन के ही वंशज हैं।

युवक पर हमला करने वाले बाघ का नाम विजय है। इसका जन्म भी 2007 में दिल्ली जू में हुआ था। इसकी मां यमुना ने इसे यहीं जन्म दिया था। यह पहला मौका है जब उसने कभी किसी पर हमला किया है।

कब-कब हुए चिड़ियाघर में जानवरों के हमले

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10 अगस्त, 2013: पटना चिड़ियाघर में एक युवक बाघ के पिंजड़े में कूदा, वहां के कर्मचारियों ने उसे बचा लिया।
9 अक्तूबर, 2012: बेल्लारी चिड़ियाघर में बाघ ने चार साल के लड़के पर हमला किया और उसका एक हाथ काट लिया।
28 मार्च, 2010: मुंबई स्थित बाइकुला चिड़ियाघर में हाथी के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई।
16 नवंबर, 2009: रायपुर (छत्तीसगढ़) में चिड़ियाघर में एक शेर ने बच्ची पर हमला करके उसका दायां हाथ खा लिया।

फैक्ट फाइल:
176 एकड़ में फैला है दिल्ली चिड़ियाघर।
1556 तरह के वन्य प्राणी यहां मौजूद हैं।
6000 हजार लोग वीक डेज में घूमने आते हैं।
13 हजार लोग वीकेंड में चिड़ियाघर में आते हैं।
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