दिल्ली में ब्लू व्हेल गेम का पहला मामला: हाथ में 42 कट लगा बच्चा बोला, पापा मैंने टास्क पूरा कर लिया
- हाथ में 42 कट लगाने के बाद बेटा बोला, कर लिया टास्क
- दिल्ली में सामने आया ब्लू व्हेल गेम का पहला मामला
- बच्चा सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर का बेटा है
- परिजनों ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल के डॉक्टरों से मांगी मदद
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राजधानी दिल्ली के सरकारी अस्पताल में पहली बार ब्लू व्हेल गेम का एक केस सामने आया है। हाथ में 42 कट लगाने के बाद गेम खेलने वाला ये बच्चा अपने पिता से कहता है, पापा मैंने टास्क पूरा कर लिया।
ये देखो, मैं मरा भी नहीं। बच्चे की इस बात को सुनकर पिता के तब और भी होश उड़ गए, जब उन्होंने हाथ पर नजर दौड़ाई। पड़ताल करने पर पता चला कि उनका बच्चा पिछले कुछ दिन से अपने फोन में ब्लू व्हेल गेम खेल रहा था। इसके बाद परिजनों ने पूर्वी दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल के डॉक्टरों से मदद मांगी।
दरअसल, यह बच्चा राजधानी के ही एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर का बेटा है। साथ ही अभी इस बच्चे को अस्पताल में पंजीकृत नहीं किया गया है। यही वजह है कि अब तक बच्चे की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि बच्चा बुधवार को गुरु तेग बहादुर अस्पताल में बाल रोग विभाग की ओपीडी में पहुंचा।
फोन से दूर रहने की सलाह दी
जहां डॉक्टरों ने सब कुछ ठीक होने का हवाला देते हुए उसे घर जाने की सलाह दी, लेकिन इसी बीच अस्पताल के मनोचिकित्सकों से मुलाकात के बाद पूरी कहानी सामने आई। कहा जा रहा है कि बच्चे को ब्लू व्हेल की जानकारी स्कूल में साथियों से मिली थी।
बताया जा रहा है कि फिलहाल डॉक्टरों ने बच्चे से फोन दूर करने की सलाह परिजनों को दी है। साथ ही कुछ दिन तक उस पर कड़ी निगरानी रखने के लिए भी कहा है। हालांकि डॉक्टरों की मानें तो ऐसे मर्ज में दवाओं से ज्यादा परिजनों का सपोर्ट जरूरी है।
माता-पिता की जागरूकता जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि ब्लू व्हेल गेम को लेकर अभी तक कोई मरीज अस्पतालों में पंजीकृत नहीं हुआ है। केवल खबरों के जरिये ब्लू व्हेल का असर डॉक्टरों को देखने को मिला है। एक डॉक्टर ने बताया कि अब तक ब्लू व्हेल की वजह से मरने वालों के बारे में ही सुना था, लेकिन पहली बार जब बच्चे को देखा, तो वे इस गेम का असर देख आश्चर्यचकित थे।
इलाज करने वाले गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने अमर उजाला से कहा कि ब्लू व्हेल जैसे मामलों में पीड़ित से ज्यादा उसके माता-पिता व परिजनों की जागरूकता जरूरी है। उन्होंने बच्चे के बारे में बताते हुए कहा कि बच्चे के पिता डॉक्टर हैं, इस वजह से वह जल्दी अस्पताल पहुंच गए। बहुत से केस ऐसे भी हैं, जो जानबूझकर अस्पताल नहीं आ रहे हैं।