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बढ़ेगी रफ्तार: कश्मीर में कल से चलेगी पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन, रेलवे ने तैयार किया खास बैलास्ट लेस रेलवे ट्रैक

Mon, 19 Feb 2024 10:51 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 19 Feb 2024 10:51 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर की घाटियों में बैलास्ट लेस ट्रैक पर ट्रेन चलेगी। इस तरह के ट्रैक का निर्माण देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन व रैपिड रेल के ट्रैक की तरह निर्माण किया गया हे।

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first electric train run in Kashmir from February 20 Railways prepared a special ballastless railway track
रेलवे ट्रैक (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर की घाटियों में अब तेज गति से ट्रेन चलेंगी। बारामूला-श्रीनगर-बनिहाल-संगलदान के बीच 185.66 किलोमीटर ट्रैक के विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया गया है। इस ट्रैक पर अब इलेक्ट्रिकल इंजन वाली ट्रेन तेज गति से चल सकेंगी। इतना ही नहीं रेलवे ने जापान की तकनीक पर आधारित बैलास्ट लेस ट्रैक तैयार किया है। साथ ही इस पूरे स्ट्रेच में भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग टी-50 से गुजरने का भी आनंद यात्री ले सकेंगे।

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जम्मू-कश्मीर की घाटियों में बैलास्ट लेस ट्रैक पर ट्रेन चलेगी। इस तरह के ट्रैक का निर्माण देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन व रैपिड रेल के ट्रैक की तरह निर्माण किया गया हे। बनिहाल-खारी-सुम्बर-संगलदान के बीच बैलास्ट लेस ट्रैक के उपयोग से यात्रा के दौरान यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घाटी में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन और संगलदान स्टेशन व बारामूला स्टेशन के बीच रेल सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे। ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना कश्मीर को पूरे देश से रेल नेटवर्क से जोड़ने वाला एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। श्रीनगर से चलने के बाद ट्रेन का अंतिम स्टेशन अब बनिहाल की जगह संगलदान बन जाएगा।

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बनिहाल-खारी-सुम्बर-संगलदान रेलवे ट्रैक पर ट्रेन चलना सामरिक दृष्टि से भी भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इससे जम्मू-कश्मीर की समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और रेलवे के अन्य मार्गो से कनेक्टिविटी भी बढ़ जाएगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार गिट्टी रहित ट्रैक व स्लैब आधारित बैलास्ट लेस ट्रैक एक प्रकार का बुनियादी ढांचा है। इसमें स्लीपर्स और गिट्टी के पारंपरिक लोचदार संयोजन को कंक्रीट के कठोर निर्माण से बदला जाता है। इस तरह के स्लैब ट्रैक का विकास जापान में हुआ था। इसपर हाई स्पीड ट्रेन चलती है।

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