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दिल्ली के पहले मरीज ने ठीक होने के बाद कहा- मैंने कोरोना को हरा दिया, कोई भी हरा सकता है...
Sun, 15 Mar 2020 11:32 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 15 Mar 2020 11:32 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
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मैंने कोरोना को हरा दिया। शुरूआत में थोड़ा बहुत डर जरूर लगा, लेकिन फिर हिम्मत बांध ली। अस्पताल में मुझे एक पल भी नहीं लगा कि मैं कोई मरीज हूं। जब मैं कोरोना को हरा सकता हूं तो कोई भी हरा सकता है।
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पहले जरूर खबरें पढ़कर मुझे कोरोना खतरनाक दिखा लेकिन अब मैं ठीक होकर घर आ गया हूं। न ज्यादा गोलियां खाईं न ज्यादा तनाव में रहा। अस्पताल में रहकर रोज वीडियो कॉल करता था। घर वालों से बातचीत करके अच्छा लगता था। सफदरजंग में डॉक्टर भी बहुत अच्छे हैं। सबने मिलकर हमें हिम्मत बांधी।
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ये कहना है दिल्ली के पहले कोरोना संक्रमित मरीज का। मयूर विहार फेज दो निवासी अब पूरी तरह से स्वस्थ्य होकर अपने घर जा चुके हैं। एहतियात के तौर पर उन्हें 14 दिन घर में आराम करने की सलाह दी है लेकिन अब पहले से ज्यादा अच्छा अनुभव कर रहे हैं।
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वे बताते हैं कि 25 फरवरी को जब वे इटली से वापस आए थे तो उन्हें बुखार हुआ था लेकिन डॉक्टर ने उन्हें दवा देकर घर भेज दिया था। इसके बाद 28 फरवरी को बच्चे की पार्टी होटल हयात में थी। पार्टी से लौटकर जब वे घर आए तो काफी बुखार आया। उस वक्त इटली में कोरोना से जुड़ी खबरें आ रही थीं तो 29 फरवरी को वे आरएमएल अस्पताल जांच कराने पहुंचे। जहां रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई।
होली के दिन जरूर उन्हें बुरा लगा लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें काफी हिम्मत दी। वार्ड में उनके पास फोन था, उसी से वे वीडियो कॉल करते थे। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से भी उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए बात की थी। वे लगातार ठीक होते जा रहे थे और यह बात उन्हें अंदर से महसूस भी हो रही थी।
14 दिन बाद जब रिपोर्ट निगेटिव आई तो उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। वार्ड में अंदर उन्हें योग भी कराया जाता। वहीं बाथरुम भी था। हर पल कोई न कोई उन्हें देखने आता रहता था। खाली टाइम निकालने के लिए वे फोन में ही फिल्में देखते थे। अस्पताल में रहते हुए उन्होंने चाणक्य नीति की किताब भी पढ़ डाली।
आगरा के छह इन्हीं से हुए थे संक्रमित
टेक्सटाइल कारोबारी रोहित बताते हैं कि वे अपने दोनों सालों के साथ इटली गए थे। वहां लेदर का बड़ा फेयर लगा था। उनके दोनों साले आगरा में लेदर का बिजनेस करते हैं। 25 फरवरी को वे दिल्ली आए थे। 28 फरवरी को हयात होटल में उनके परिवार और आगरा के रिश्तेदारों के अलावा दो दोस्त भी थे। बेटे के जन्मदिन की पार्टी खत्म होने के बाद घर लौटते ही बुखार आ गया था।
14 दिन बाद जब रिपोर्ट निगेटिव आई तो उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। वार्ड में अंदर उन्हें योग भी कराया जाता। वहीं बाथरुम भी था। हर पल कोई न कोई उन्हें देखने आता रहता था। खाली टाइम निकालने के लिए वे फोन में ही फिल्में देखते थे। अस्पताल में रहते हुए उन्होंने चाणक्य नीति की किताब भी पढ़ डाली।
आगरा के छह इन्हीं से हुए थे संक्रमित
टेक्सटाइल कारोबारी रोहित बताते हैं कि वे अपने दोनों सालों के साथ इटली गए थे। वहां लेदर का बड़ा फेयर लगा था। उनके दोनों साले आगरा में लेदर का बिजनेस करते हैं। 25 फरवरी को वे दिल्ली आए थे। 28 फरवरी को हयात होटल में उनके परिवार और आगरा के रिश्तेदारों के अलावा दो दोस्त भी थे। बेटे के जन्मदिन की पार्टी खत्म होने के बाद घर लौटते ही बुखार आ गया था।