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डीटीसी की पहली और इकलौती महिला ड्राइवर सिर्फ 3 साल में छोड़ना चाहती है नौकरी, ये है वजह

Thu, 30 Aug 2018 12:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Aug 2018 12:04 PM IST
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first and only woman driver of dtc bus sarita want to quit her job reason is saddening
dtc woman driver sarita

बड़े सपनों और बेहतर भविष्य की आस में 30 वर्षीय सरिता ने जब डीटीसी की पहली महिला बस ड्राइवर के रूप में पदभार संभाला तो कभी नहीं सोचा था कि जल्द ही उन्हें ये नौकरी छोड़ने की नौबत आ जाएगी। मात्र 18 वर्ष की उम्र से ही ड्राइविंग कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही सरिता ने डीटीसी में संविदा कर्मी के रूप में नौकरी शुरू की थी लेकिन तीन साल बीत जाने पर भी न उन्हें परमानेंट किया गया न ही उनकी सैलरी बढ़ाई गई है।

first and only woman driver of dtc bus sarita want to quit her job reason is saddening
dtc woman driver sarita

सरिता तेलंगाना की रहने वाली हैं और उन्होंने तीन साल पहले डीटीसी की प्रथम महिला चालक के रूप में नौकरी शुरू की थी। वह आनंद विहार से कापसहेड़ा के बीच लंबे और सबसे अधिक व्यस्त रहने वाले रूट पर बस चलाती हैं। भले ही वह बस में चालक होती हैं लेकिन अक्सर ही उन्हें मनचलों से जेब कतरों तक का सामना करना पड़ता है। लेकिन वह इन सब से कभी घबराई नहीं और वह अन्य लड़कियों को भी निडर रहने को कहती हैं।

first and only woman driver of dtc bus sarita want to quit her job reason is saddening
dtc woman driver sarita - फोटो : अमर उजाला

सरिता जैसे डीटीसी बस ड्राइवरों और कंडक्टरों को कोई भी साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता। दुख की बात तो ये है कि बिना छुट्टी के भी पूरे महीने काम करने पर उन्हें सैलरी के नाम पर मिलते हैं सिर्फ 12 हजार रुपए। यही वजह है कि बढ़ती महंगाई और टूटती उम्मीदों के बीच सरिता ने नौकरी छोड़ वापस तेलंगाना जाने का मन बना लिया है। उनके अनुसार इतनी सैलरी में बड़े शहर में गुजारा करना काफी मुश्किल है।

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dtc woman driver sarita

यह जानकर आप उनके जज्बे और हौसले को सलाम करेंगे कि उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन वो कहती है कि पुरस्कारों से घर नहीं चलते, उसके लिए पैसे चाहिए। वो कहती हैं कि अपने घर तेलंगाना से और अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ वो यहां सिर्फ इसी आस में आई थीं कि उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी तो सैलरी से लेकर पेंशन सब की सुविधा हो जाएगी। लेकिन तीन साल बाद भी जो हालात हैं उससे वह टूटने लगी हैं।

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dtc woman driver sarita - फोटो : अमर उजाला
सरिता की जिंदगी कभी भी आसान नहीं रही। पांच बहनों में सबसे छोटी सरिता ने 18 साल की उम्र में ही ऑटो चलाना शुरू कर दिया था। बहनों की शादी से लेकर अपना घर बनाने तक का काम सरिता के ऑटो चलाने से होने वाली आमदनी से ही हुआ। वह चाहती हैं कि अन्य लड़कियां भी छोटे गांवों से निकलकर शहरों तक पहुंचे और अपना मुकाम हासिल करें। हालांकि अब वह परमानेंट नौकरी न हो पाने और सैलरी न बढ़ने के चलते डीटीसी बस चलाने से कतराने लगी हैं। 
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