यौन उत्पीड़न केस में फंसे पर्यावरणविद पचौरी
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मशहूर पर्यावरणविद राजेंद्र पचौरी पर एक महिला का यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगे हैं। एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक महिला शोध विश्लेषक की शिकायत पर द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट (टेरी) के महानिदेशक पचौरी के खिलाफ बुधवार देर रात यहां लोधी कालोनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
गौरतलब है कि पचौरी इंटरगवर्नमेंटल पेनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के 2002 से ही प्रमुख हैं जिसे 2007 में संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार मिला था। यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा का हनन, घूरने और आपराधिक मंशा रखने की धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत मेहंदीरत्ता ने बताया कि पीड़िता का बयान रिकॉर्ड करने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। बयान रिकॉर्ड करने की कार्रवाई बृहस्पतिवार 11 बजे समाप्त हुई जिसके बाद सब-इंस्पेक्टर प्रतिभा शर्मा को आगे की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया।
जांच के बाद पचौरी के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए तो आरोप तय किए जा सकते हैं। गौरतलब है कि महिला ने गत 13 फरवरी को ही शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर इस बाबत खबर प्रकाशित करने पर रोक लगा दी गई थी।
मेरे खिलाफ आरोप झूठे: पचौरी
पचौरी ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है और बताया कि उन्हें फंसाया जा रहा है। पचौरी ने अपने कंप्यूटर संसाधन के दुरुपयोग की भी आशंका जताई है। पचौरी ने बताया कि उन्होंने किसी महिला को कोई आपत्तिजनक मेल नहीं किया है और यह सब साइबर अपराधियों की साजिश है। ऐसा हो सकता है कि किसी ने बिना मेरी इजाजत के मेरे संचार माध्यमों का दुरुपयोग किया हो।
यह भी बताया कि सूचना कानून के तहत उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मामले की शिकायत की है। दावा किया कि जिस कंप्यूटर आउटपुट के आधार पर आरोप लगाए गए हैं वे बेबुनियाद, झूठे और साजिश के तहत काटछांट करके तैयार किए गए हैं।
33 पेज की शिकायत
पीड़िता ने 33 पेज की अपनी शिकायत में पचौरी के खिलाफ एक से बढ़कर एक संगीन आरोप लगाए हैं। शिकायत में पचौरी पर महिला के शरीर को आपत्तिजनक तरीके से छूने, ई-मेल भेजने, टेक्स्ट और वाट्सएप मेसेज भेजने के आरोप का जिक्र किया गया है। महिला के मुताबिक मना करने के बावजूद पचौरी नहीं सुधरे और मेसेज करना जारी रखा।
शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354ए, 354डी और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा महिला का करीब डेढ़ घंटे तक बयान रिकॉर्ड किया गया। बयान के मुताबिक उसका न केवल यौन उत्पीड़न हुआ बल्कि एक महिला की गरिमा को तार-तार कर दिया गया।
यौन शोषण मामले में खबरों के प्रकाशन से हटायी पाबंदी
हाईकोर्ट ने यौन शोषण के मामले में आरोपी राजेंद्र पचौरी के आवेदन पर सुनवाई के बाद अपने पिछले आदेश में संशोधन किया है। हाईकोर्ट में संशोधन करते हुये इस मामले में आरोपी के खिलाफ यौन शोषण समिति की फाइनल रिपोर्ट अथवा शिकायतकता की शिकायत के मद्देनजर पुलिसिया कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट मीडिया में प्रकाशन से प्रतिबंध हटा लिया है।
जस्टिस जयंत नाथ की पीठ ने आवेदन पर सुनवाई के बाद 17 फरवरी 2015 अपने अंतरिम आदेश में संशोधन किया है। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अ) के अंतर्गत प्रेस की स्वतंत्रता के अधिकार के मद्देनजर संशोधन किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में खबरों के प्रकाशन व प्रसारण पर अपने पिछले आदेश के माध्यम से रोक लगा दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने आवेदन पर जवाब देने के लिये एक माह का समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई के लिये आठ अप्रैल की तारीख तय की गयी है।