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Delhi : गंगा-यमुना के बीच की भूमि पर स्वामित्व का दावा करने वाले से अदालत नाराज, लगाया 10 हजार का जुर्माना

Wed, 20 Dec 2023 01:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 20 Dec 2023 01:48 AM IST
सार

याचिकाकर्ता कुँवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह ने यह कहते हुए अदालत का रुख किया था कि वह बेसवान अविभाज्य राज्य के उत्तराधिकारी हैं, जिसका भारत संघ में कभी विलय नहीं हुआ।

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fine of Rs 10,000 for claiming ownership of the land between Ganga and Yamuna
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आगरा, मेरठ, अलीगढ़ और दिल्ली, गुड़गांव और उत्तराखंड की 65 राजस्व संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा करने वाले व्यक्ति पर 10,000 का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता कुँवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह ने यह कहते हुए अदालत का रुख किया था कि वह बेसवान अविभाज्य राज्य के उत्तराधिकारी हैं, जिसका भारत संघ में कभी विलय नहीं हुआ।

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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि सिंह ने केवल कुछ नक्शे और लेख ही दाखिल किए हैं जो बेसवान परिवार के अस्तित्व का संकेत नहीं देते हैं या इस बात पर कोई प्रकाश नहीं डालते हैं कि उन्हें उक्त रियासत का उत्तराधिकारी होने का कोई अधिकार कैसे है। न्यायालय ने माना कि याचिका पूरी तरह से गलत है, कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और न्यायिक समय की पूरी बर्बादी है।
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उन्होंने कहा इस न्यायालय की राय है कि रिट याचिका पूरी तरह से गलत है। वर्तमान रिट याचिका में याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए दावों पर रिट याचिका में विचार या निर्णय नहीं किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने केवल कुछ नक्शे, ऐतिहासिक विवरण दाखिल किए हैं, जो इस न्यायालय की राय में बेसवान परिवार के अस्तित्व या याचिकाकर्ता के किसी भी अधिकार के अस्तित्व का संकेत नहीं देते हैं।
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फैसले, विकिपीडिया रिपोर्ट के उद्धरण, भारत के राजनीतिक एकीकरण के दस्तावेज़, विलय पत्र भी याचिकाकर्ता के मामले की पुष्टि नहीं करते। अदालत ने याचिका खारिज कर दी और सिंह को चार सप्ताह की अवधि के भीतर सशस्त्र बल युद्ध हताहत कल्याण कोष में 10,000 रुपये जमा करने का आदेश दिया।

याची ने दावा किया कि आज भी उनका परिवार एक रियासत का दर्जा रखता है और उनके स्वामित्व वाले सभी क्षेत्र कभी भी भारत सरकार को हस्तांतरित नहीं किए गए। सिंह ने सरकार से ''''बेसवा के संप्रभु राज्य अविभाजय राज्य'''' के साथ विलय की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से अपनाने और वर्ष 1950 से इन जमीनों के लिए एकत्रित राजस्व का भुगतान करने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की।


कई अन्य राहतों के बीच सिंह ने भारत सरकार को आधिकारिक विलय तक अपने क्षेत्र में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव न कराने का निर्देश देने की भी मांग की थी। याची ने पहले कुतुब मीनार के स्वामित्व का दावा करते हुए दिल्ली के साकेत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 20 सितंबर 2022 को कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी।

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