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खास खबरः फाइलों में सिमटी 13 हॉटस्पॉट में प्रदूषण से लड़ाई, महापौर बोले- काम तो कर रहे हैं जी...

Sun, 25 Oct 2020 06:25 AM IST
Dushyant Sharma दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 25 Oct 2020 06:25 AM IST
सार

  • धरातल पर विशेष इंतजाम नहीं होने के कारण स्थिति अभी भी खराब
  • नगर निगम और स्थानीय प्रशासन कर रहे प्रदूषण नियंत्रण के दावे

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Fighting pollution is confined to files in 13 hotspots in delhi
बेहाल दिल्ली... - फोटो : amar ujala

विस्तार

दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों की सांसें फुलाने लगा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार बढ़ रहा है, लेकिन 13 हॉटस्पॉट केंद्रों पर प्रशासन और नगर निगम प्रदूषण नियंत्रण के जो दावे कर रहे हैं, वह सिर्फ फाइलों में सिमटते नजर आ रहे हैं। धरातल पर धूल के गुबार हैं और लोग हाल-बेहाल हैं। इन्हीं हॉटस्पॉट की  वर्तमान स्थिति बता रहे हैं ‘अमर उजाला’ संवाददाता किशन कुमार...

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नाकाफी हैं व्यवस्था, बिगड़ी रही हवा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भूरेलाल की अध्यक्षता में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) का गठन किया गया था। ईपीसी ने 15 अक्तूबर से राजधानी में कार्रवाई करते हुए डीजल जनरेटर पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। हाल ही में प्रदूषण वाले 13 हॉटस्पॉट केंद्रों की पहचान की गई, जहां राजधानी में सबसे अधिक प्रदूषण पाया गया। इस पर नियंत्रण के लिए प्रशासन और स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, परंतु वहां अभी भी इंतजाम नाकाफी हैं। शनिवार को भी 13 जगहों पर एक्यूआई खराब श्रेणी में रहा। सबसे खराब हालात मुंडका में रहे, जहां एक्यूआई 428 पर पहुंच गया। आनंद विहार में भी खराब स्थिति रही।
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उत्तरी निगम में सबसे अधिक केंद्र
राजधानी के तीनों नगर निकायों के अंतर्गत अलग-अलग हॉटस्पॉट आते हैं। इसमें सबसे अधिक छह हॉटस्पॉट उत्तरी निगम क्षेत्र में हैं। दक्षिणी निगम में चार और सबसे कम तीन हॉटस्पॉट
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पूर्वी निगम क्षेत्र में हैं।

निगमों में हवा की स्थिति
उत्तरी निगम - 
हॉटस्पॉट    एक्यूआई
बवाना    394
नरेला    373
मुंडका    428
रोहिणी    357
जहांगीरपुरी    377
वजीरपुर    392

दक्षिणी निगम -
आरकेपुरम    330
पंजाबी बाग    355
ओखला    343
द्वारका    343

पूर्वी निगम -
आनंद विहार    396
विवेक विहार    387
पटपड़गंज    357

 

क्या है निगम और प्रशासन की जिम्मेदारी

निगम क्षेत्रों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगम और प्रशासन की जिम्मेदारी तय की गई है। इसके तहत कार्रवाई करने का सबसे अधिक अधिकार निगम के पास है, जो खुले में कूड़ा जलाने या मलबा डालने पर 500 से 5000 रुपये तक का चालान कर सकता है। स्थानीय प्रशासन भी इसके लिए जिम्मेदार है। हालांकि, कई मामलों में प्रशासन के पास चालान काटने का अधिकार नहीं होता है। ऐसे में चालान काटने की जिम्मेदारी अमूमन निगम की ओर से ही बनती है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी का कहना है कि कई बार पीडब्ल्यूडी की   सड़क पर मलबा डालते हुए पकड़ा जाता है, लेकिन जब तक कार्रवाई के लिए पुलिस और निगम को बुलाया जाता है तब तक मलबा डालने वाला ट्रक मालिक उपरोक्त विभागों में जान-पहचान निकाल निकल जाता है। 

प्रदूषण नियंत्रण के लिए दावों की फाइल 
हॉटस्पॉट केंद्रों पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्थानीय निकाय तमाम दावे कर रहे हैं। इनके तहत वाटर स्प्रिंकलर से लेकर रात्रि गश्त के लिए 30 टीमों का गठन भी किया गया है। बावजूद, हॉटस्पॉट पर वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में चल रहा है। यदि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात करें तो दक्षिणी निगम ने एक सप्ताह के भीतर करीब 618 चालान किए गए हैं। इससे निगम को 98 लाख का राजस्व मिला। पूर्वी निगम ने 21 अक्तूबर तक 629 चालान किए, जबकि उत्तरी निगम 29 चालान कर चुका है। नगर निगमों के अनुसार, हॉटस्पॉट केंद्रों पर पानी छिड़काव के लिए स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। एंटी स्मॉग गन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा...
हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 30 टीम गठित हैं। 40 वाटर स्प्रिंकलर लगातार काम कर रहे हैं। रात्रि गश्त के लिए भी कर्मचारी नजर बनाए हुए हैं। एंटी स्मॉग गन
का इस्तेमाल किया जा रहा है।
-निर्मल जैन, महापौर-पूर्वी दिल्ली नगर निगम

स्प्रिंकलर टैंकर से प्रतिदिन 600 किलोमीटर सड़क पर पानी छिड़काव किया जा रहा है। 83 स्प्रिंकलर टैंकर लगे हुए हैं। ओखला में एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल हो रहा है।
 -अनामिका, महापौर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम

-हम अपने अंतर्गत आने वाले सभी हॉटस्पॉट में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए काम कर रहे हैं। आगे भी इसको लेकर रणनीति तैयार की जाएगी, जबकि दिल्ली सरकार प्ले कार्ड के
माध्यम से सिर्फ राजनीति करने पर तुली हुई है। प्लेकार्ड में ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिससे प्रदूषण कम किया जा सके।
-जयप्रकाश, महापौर, उत्तरी दिल्ली नगर निगम

राजधानी में गर्मी के मुकाबले सर्दी में हवा की रफ्तार कम हो जाती है। यही वजह है कि प्रदूषित तत्व हवा में उड़ने के बजाय ऊपरी सतह पर जम जाते हैं और प्रदूषण बढ़ता है। हॉटस्पॉट
केंद्रों पर चलने वाली औद्योगिक इकाइयों और वाहनों के कारण राजधानी में प्रदूषण बढ़ रहा है। सरकार को उन इकाइयों की पहचान करनी चाहिए जो प्रदूषण नियमों का पालन नहीं कर
रही हैं। यातायात की दिशा में भी अहम कदम उठाने की आवश्यकता है।
-भुवन भास्कर, पर्यावरण विशेषज्ञ

कोरोना संक्रमण और धूल के कणों से बचने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करना चाहिए। इस मौसम में कम से कम घर से बाहर निकलें। फेफड़ों तक धूल के कण नहीं
पहुंचने चाहिए। इसके अलावा फेफड़ों संबंधी शारीरिक गतिविधियों व योग को भी करना चाहिए।
-डॉ जुगल किशोर, अध्यक्ष-मेडिसिन विभाग सफदरजंग अस्पताल

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