फिर आमने-सामने आए उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार, लगाया गंभीर आरोप
-उपराज्यपाल की सलाह को सरकार ने बताया गलत, योजना के नाकाम होने का बताया खतरा
-डोर स्टेप डिलीवरी स्कीम पर भी हो चुका है विवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डोर स्टेप डिलीवरी स्कीम के बाद अब क्वालिटी हेल्थ फॉर आल स्कीम पर दिल्ली की चुनी हुई सरकार व उपराज्यपाल अनिल बैजल आमने-सामने हैं। दिल्ली सरकार का कहना है कि उपराज्यपाल एक बार फिर दिल्ली वालों की बेहतरी के लिए तैयार योजना पर ब्रेक लगा रहे हैं।
उनके सुझावों को मान लिया गया तो योजना अपने मकसद को पूरा नहीं कर सकेगी। दिल्ली सरकार का आरोप है कि एक बार फिर उपराज्यपाल ने बगैर मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा किए योजना में बदलाव की सिफारिश की है।
दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि उपराज्यपाल से उम्मीद थी कि वह नए साल पर दिल्ली के सभी वर्गों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाने के कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूर कर लेेंगे।
इसके तहत मोहल्ला क्लीनिक में फ्री टेस्ट की सुविधा मिलनी थी। वहीं, एमआरआई के अलावा दूसरी सभी जांच प्राइवेट अस्पताल या लैब में कराने की योजना है। 50 अस्पतालों में 50 तरह की सर्जरी की योजना चल रही थी, यह स्कीम बजट में पेश भी की गई थी। इसका सारा खर्चा सरकार उठाती थी।
जैन का कहना है कि उपराज्यपाल ने अब निजी अस्पताल व जांच केंद्रों में टेस्ट के लिए इनकम लिमिट लगाने को कहा है, लेकिन इससे बड़ी अड़चन पैदा होगी। इलाज से पहले मरीज को सर्टिफिकेट बनाने के लिए एसडीएम दफ्तर के चक्कर काटने पड़ेंगे।
जैन के मुताबिक, फिलहाल एमआरआई कराने में तीन हजार रुपये लगते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में साल भर की वेटिंग होती है। जबकि इस योजना से मरीज को तत्काल राहत मिल जाएगी। दिलचस्प यह कि दिल्ली सरकार ने इसके लिए केंद्र से कोई आर्थिक मदद भी नहीं मांगी है। बजट में ही इसका प्रावधान किया गया था।
सरकारी सिस्टम को मजबूत करने की उपराज्यपाल की सलाह पर सत्येंद्र जैन ने कहा कि इसे मजबूत किया जा रहा है, लेकिन तत्कालिक तौर पर राहत दिलाने के लिए योजना जरूरी है। उन्होंने माना कि अभी अभी फ्री सर्जरी और जांच की स्कीम पहले की तरह चलती रहेगी। सरकार उपराज्यपाल के साथ इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करेगी।
उपराज्यपाल बोले, मीडिया में फैलाया जा रहा भ्रम
दिल्ली सरकार की तरफ से क्वालिटी हेल्थ फॉर आल योजना को नाकाम करने के आरोप लगाए जाने के बाद उपराज्यपाल कार्यालय ने इस मामले में सफाई दी है कि भ्रामक तथ्यों के सहारे मीडिया में भ्रम फैलाया जा रहा है।
राजनिवास की तरफ से बताया गया है कि एक आय वर्ग को ही योजना का फायदा देने की बात कही गई है। न तो इससे मध्यम आय वर्ग को बाहर करने को कहा गया है, न ही प्रमाण पत्र बनवाने की सिफारिश की गई है।
उपराज्यपाल की तरफ से कहा गया है कि उन्होंने सरकार की हर सकारात्मक पहल का समर्थन किया है। उन्होंने ने सिर्फ योजना और वित्त विभाग की सिफारिशों के आधार पर आय मानदंड का सुझाव दिया है। इसकी वजह यह है कि सरकार के पास असीमित संसाधन नहीं है।
करदाताओं के पैसों का इस्तेमाल अमीरों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए किया जाना क्या सही होगा? उपराज्यपाल ने योजना के दायरे से मध्यम आय वर्ग को बाहर करने की सलाह कभी नहीं दी।
वहीं, प्रमाण पत्र की जरूरत भी नहीं है। इसके लिए लोगों पर भरोसा करना चाहिए और स्वयं प्रमाण पत्र को लागू करना चाहिए। उपराज्यपाल के मुताबिक, दिल्ली के निवासियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल वितरण प्रणाली को मजबूत करने के कैबिनेट के फैसलों पर सहमति दी थी।
हालांकि, इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत तंत्र बनाने की आवश्यकता बताई थी। साथ ही सरकारी अस्पतालों को भी मजबूत करने को कहा था। अगर निर्वाचित सरकार का नजरिया अलग है तो मामले को आपस में विचार किया जा सकता है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मीडिया के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने का फिर से प्रयास किया जा रहा है।
'सरकारी अस्पतालों के ढांचे को कमजोर कर रही है आप सरकार'
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी अस्पतालों के मूलभूत ढांचे को कमजोर कर रही है। इस कड़ी में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा टीमों एवं दवाई उपलब्धता में कमी की जा रही है।
तिवारी ने कहा कि आप के शासन में दिल्ली के समस्त सरकारी अस्पतालों का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। इसका सबसे अधिक नुकसान समाज के आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को हुआ है।
इसी का लाभ उठाकर आप सरकार ने निजी अस्पतालों में लोगों के नि:शुल्क इलाज की एक योजना बनाई, मगर उसमें यह स्पष्ट नहीं किया कि समाज के किस वर्ग को यह सुविधा दी जाएगी।
इस तरह निजी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज की सुविधा देने का आप सरकार का प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक छलावा है, क्योंकि ऐसी योजनाएं हमेशा वर्गीकृत तरीके से बनाई जाती हैं तभी उन्हें संविधानिक मान्यता मिलती है।
उन्होंने कहा कि आप सरकार के निजी अस्पतालों में इलाज की योजना को लागू करने के तरीके उसकी मंशा आम नागरिकों के बजाए आप से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं नेताओं को सुविधा देने की है। अगर आप सरकार समाज के आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को निजी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज की सुविधा सच में देना चाहती है तो उसके लिए वह कानूनी प्रक्रिया पूरी करे।
खेलों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण से सहयोग लेगा निगम
दक्षिण दिल्ली नगर निगम खेलों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण से सहयोग लेगा। इसके लिए वह अपने चार प्रमुख स्टेडियमों का कायाकल्प और खेल प्रतिभा विकास की दृष्टि से सर्वोत्तम बनाकर भारतीय खेल प्राधिकरण की विशेषज्ञता का फायदा उठाएगी।
इस संबंध में नगर निगम के नेताओं ने बुधवार को केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौर से मुलाकात की। महापौर कमलजीत सहरावत, स्थायी समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता और नेता सदन शिखा राय ने केंद्रीय खेल मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने खेल मंत्री को बताया कि नगर निगम बच्चों में शुरू से ही खेल की रुचि विकसित कर उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाना चाहती है। इसके लिए बेहतरीन स्टेडियमों और खेल उपकरणों की जरूरत होगी।
नेशनल अकाली दल ने राज्यसभा की एक सीट सिख को देने की मांग की
नेशनल अकाली दल ने आम आदमी पार्टी से राज्यसभा की एक सीट सिख समुदाय को देने की मांग की है। दल के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि आप ने दिल्ली सरकार में एक भी सिख विधायक को मंत्री नहीं बनाया है। इस कारण लगता है कि आप सिख समुदाय की अनदेखी कर रही है। क्योंकि दिल्ली में हमेशा एक मंत्री सिख समुदाय के विधायक को बनाया जाता रहा है, मगर आप ने ऐसा नहीं किया। आप को इसकी भरपाई करने के लिए राज्यसभा की एक सीट सिख समुदाय को देनी चाहिए।