'ऑफिस में दोनो अधिकारियों के बीच होने लगी थी जबरदस्त बहस'
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भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में चीफ की कुर्सी को लेकर मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल की खींचतान अब इनकी तरफ से नियुक्त दोनों अधिकारियों के बीच शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री की तरफ से नियुक्त एसएस यादव ने उपराज्यपाल की तरफ से नियुक्त एसीबी चीफ मुकेश मीणा पर धमकाने का आरोप लगाया है। फिर दोनों के बीच तू-तू मैं-मैं यहां तक हुई कि दफ्तर खाली कराने की आशंका को लेकर एसएस यादव ने सतर्कता निदेशक को पत्र लिखा है।
मामले में एमके मीणा ने अपना पक्ष रखने के लिए उपराज्यपाल से मुलाकात की तो मुख्यमंत्री ने मामले में गृहमंत्री को गुप्त चिट्ठी लिखकर हालात से अवगत करवाया है। इससे पूर्व एसएस यादव ने पुलिस आयुक्त और उपराज्यपाल को भी पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत करवाया है। यादव ने पत्र में दिल्ली पुलिस से नजदीकी का हवाला देकर मीणा की तरफ से जबरदस्ती ऑफिस खाली कराने का अंदेशा जताया है।
सूत्रों के अनुसार मामला बुधवार की शाम का है। जब मुकेश मीणा ने एसएस यादव को बुलाया और एफआईआर बुक के विषय में बात की। इस बीच दोनों अधिकारियों के बीच तू-तू-मैं-मैं हुई। हालात इतने बिगड़ गए कि यादव ने तनाव के कारण आत्महत्या करने की बात तक कह दी।।
यादव ने चिट्ठी में बयां किया अपना दर्द
‘अमर उजाला’ के पास 24 जून को एसएस यादव की तरफ से सतर्कता सचिव व निदेशक को लिखी है, इसमें एमके मीणा को अवैध रूप से एसीबी दफ्तर में कब्जा करके बैठने का जिक्र किया गया है। उसमें बताया है कि मीणा ने उसी दिन शाम को बुलाया और एफआईआर बुक मांगी।
मीणा ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को दिखाने के लिए एसीबी थाने के बाहर ले जाना है। मैंने कहा कि एसीबी में एफआईआर बुक सुरक्षित है, बाहर ले जाना अवैध है। जब मैं एसीबी मुख्यालय गया तो उसी समय मीणा भी वहां पहुंचे, मुझ पर एफआईआर बुक के लिए दबाव डाला और धमकी भी दी।
एसएस यादव ने मुख्यालय में अवैध तरीके से सीआरपीएफ जवान की नियुक्ति की जानकारी भी दी है। इसमें लिखा हे कि मुझे इससे पहले भी धमकी मिलती रही है। दिल्ली पुलिस के खिलाफ दर्ज एफआईआर 10/2015 और 15/2015 को स्थानांतरित करने का दबाव भी बनाया है। मैंने इस मामले में साफ कर दिया है कि मामला सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के संज्ञान में है। अगर ऐसा किया जाता है तो न्यायालय की अवमानना होगी।
मेरे जूनियर भी परेशान, कानून कार्रवाई करे
एसीबी सीधे तौर पर दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग के अधीन काम करता है। इसलिए यहां के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी विजिलेंस डिपार्टमेंट व सरकार की है।
एसीबी के ज्यादातर अधिकारी दिल्ली पुलिस से हैं। एमके मीणा ने इन्हें करियर खराब करने की धमकी दे रहे हैं। ऐसे हालात में काम करना मुश्किल हो रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने के कारण मेरे जीवन, स्वतंत्रता व ओहदे का नुकसान पहुंचाने का षड्यंत्र रचा जा सकता है। इसलिए कानूनी कार्रवाई करें।