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Delhi NCR News: बसें कम, चालकों को बना दिया टिकट जांचकर्ता
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डीटीसी के पास खुद की बसें नहीं, निजी कंपनियों की बढ़ी भूमिका, यूनियन ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के जिन चालकों के हाथ स्टीयरिंग पर होने चाहिए, वे अब बसों में बिना टिकट यात्रा करने वालों की जांच कर रहे हैं। डीटीसी में यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि निगम के पास अब अपनी पर्याप्त बसें नहीं बची हैं।
सूत्रों के अनुसार, डीटीसी की लगभग 3,000 पुरानी बसें सड़कों से हट चुकी हैं। निगम के बेड़े में फिलहाल करीब 2,800 बसें हैं, लेकिन इनमें से केवल 200 बसें ही ऐसी हैं जिन पर डीटीसी के अपने चालक तैनात हैं। शेष इलेक्ट्रिक बसें निजी कंपनियों द्वारा किलोमीटर स्कीम पर चलाई जा रही हैं, और उनके चालक भी वही कंपनियां उपलब्ध कराती हैं।
ऐसे में डीटीसी के करीब 3,000 चालक फिलहाल बिना नियमित काम के रह गए हैं। इनमें से पढ़े-लिखे लगभग 100 चालकों को डीटीसी के दफ्तरों में तैनात किया गया है, जबकि शेष चालकों को अस्थायी तौर पर टिकट जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
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इस बीच, दिल्ली सरकार के सेवा विभाग ने आदेश जारी किया है कि जिन सरकारी विभागों को चालकों की आवश्यकता है, वे डीटीसी से चालक मांग सकते हैं। ऐसे मामलों में चालकों का वेतन संबंधित विभाग को ही देना होगा।
हालांकि, डीटीसी कर्मचारी यूनियन ने इस कदम पर नाराजगी जताई है। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि चालकों का अचानक मेडिकल परीक्षण कराए जाने के पीछे उन्हें नौकरी से निकालने की साजिश हो सकती है। उनका कहना है कि जब चालक बस चला ही नहीं रहे, तो मेडिकल जांच की जरूरत क्यों है।
यूनियन ने यह भी मांग की है कि जब तक डीटीसी के पास अपनी बसें नहीं हैं, तब तक चालकों को अन्य सरकारी विभागों में नियमित रूप से समायोजित किया जाए, न कि अस्थायी टिकट जांचकर्मी बनाकर उनकी स्थिति अस्थिर रखी जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के जिन चालकों के हाथ स्टीयरिंग पर होने चाहिए, वे अब बसों में बिना टिकट यात्रा करने वालों की जांच कर रहे हैं। डीटीसी में यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि निगम के पास अब अपनी पर्याप्त बसें नहीं बची हैं।
सूत्रों के अनुसार, डीटीसी की लगभग 3,000 पुरानी बसें सड़कों से हट चुकी हैं। निगम के बेड़े में फिलहाल करीब 2,800 बसें हैं, लेकिन इनमें से केवल 200 बसें ही ऐसी हैं जिन पर डीटीसी के अपने चालक तैनात हैं। शेष इलेक्ट्रिक बसें निजी कंपनियों द्वारा किलोमीटर स्कीम पर चलाई जा रही हैं, और उनके चालक भी वही कंपनियां उपलब्ध कराती हैं।
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ऐसे में डीटीसी के करीब 3,000 चालक फिलहाल बिना नियमित काम के रह गए हैं। इनमें से पढ़े-लिखे लगभग 100 चालकों को डीटीसी के दफ्तरों में तैनात किया गया है, जबकि शेष चालकों को अस्थायी तौर पर टिकट जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
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इस बीच, दिल्ली सरकार के सेवा विभाग ने आदेश जारी किया है कि जिन सरकारी विभागों को चालकों की आवश्यकता है, वे डीटीसी से चालक मांग सकते हैं। ऐसे मामलों में चालकों का वेतन संबंधित विभाग को ही देना होगा।
हालांकि, डीटीसी कर्मचारी यूनियन ने इस कदम पर नाराजगी जताई है। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि चालकों का अचानक मेडिकल परीक्षण कराए जाने के पीछे उन्हें नौकरी से निकालने की साजिश हो सकती है। उनका कहना है कि जब चालक बस चला ही नहीं रहे, तो मेडिकल जांच की जरूरत क्यों है।
यूनियन ने यह भी मांग की है कि जब तक डीटीसी के पास अपनी बसें नहीं हैं, तब तक चालकों को अन्य सरकारी विभागों में नियमित रूप से समायोजित किया जाए, न कि अस्थायी टिकट जांचकर्मी बनाकर उनकी स्थिति अस्थिर रखी जाए।