बृज भूषण सिंह को राहत: महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में आदेश टला: चार्ज फ्रेम का बढ़ा इंतजार
महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में भाजपा नेता बृज भूषण सिंह पर 10 मई को आदेश आ सकता है। फिलहाल, चार्ज फ्रेम का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को बृज भूषण सिंह और एक अन्य के खिलाफ छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न मामले में आरोप तय करने पर आदेश टाल दिया है। अब इस मामले में 10 मई को आदेश आ सकता है।
Brij Bhushan Sharan Singh case | Delhi's Rouse Avenue Court defers order on 'framing of charges in the matter related to sexual harassment leveled by six women wrestlers against Brij Bhushan Singh and one other. Court fixed May 10, for the pronouncement of the order.
विज्ञापन
— ANI (@ANI) May 7, 2024
इससे पहले 26 अप्रैल को अदालत ने महिला पहलवान यौन शोषण मामले में आरोपी भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह की उस अर्जी को खारिज कर दिया था। जिसमें उन्होंने महिला पहलवानों द्वारा उनके खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न मामले में आगे की जांच की मांग की थी। राउज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट प्रियंका राजपूत ने 7 मई को मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था।
जानकारी के लिए बता दें कि भाजपा सांसद द्वारा आवेदन दायर करने के बाद 18 अप्रैल को अदालत ने सिंह के खिलाफ आरोप तय करने पर आदेश टाल दिया था। अपने आवेदन में सिंह ने आरोप तय करने पर आगे की दलीलें पेश करने की अनुमति मांगी। उन्होंने दिल्ली पुलिस को घटना की कथित तारीख सात सितंबर 2022 को डब्ल्यूएफआई कार्यालय में उनकी उपस्थिति के संबंध में जांच करने का निर्देश देने की मांग की।
उन्होंने दावा किया था कि वह संबंधित तारीख पर भारत में नहीं थे। ताजा आवेदन में दिल्ली पुलिस को सीडीआर रिकॉर्ड में रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एपीपी अतुल श्रीवास्तव ने आवेदन का विरोध किया था और कहा था कि इसे देरी से दायर किया गया है। उन्होंने कहा था कुछ रुकावट होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि आवेदन आगे की जांच की मांग करने जैसा है और इसके कानूनी निहितार्थ होंगे जिन पर बहस करनी होगी।
शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा था कि आवेदन में देरी करने की रणनीति थी और सीआरपीसी की धारा 207 के स्तर पर दस्तावेज मांगे जा सकते थे। सिंह इस मामले में सह-अभियुक्त विनोद तोमर, जो भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव हैं के साथ जमानत पर हैं। दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने उनके खिलाफ धारा 354, 354 ए, 354 डी और 506 (1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था। हालाँकि एक नाबालिग पहलवान द्वारा सिंह के खिलाफ दर्ज पोक्सो मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई है।
भाजपा विधायक पर महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यौन उत्पीड़न की कथित घटनाएं 2016 और 2019 के बीच डब्ल्यूएफआई कार्यालय, सिंह के आधिकारिक आवास और विदेश में भी हुईं।