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Delhi NCR News: फेमा ने मेडिकल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पीएम को लिखा पत्र
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- कोचिंग संस्थानों की जांच, नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल स्नातकों का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में नीट पीजी, एफएमजीई और आईएनआई सीईटी जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की खामियों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
फेमा के अनुसार हर वर्ष हजारों मेडिकल छात्र भारी फीस चुकाने के बावजूद ऐसे कोचिंग केंद्रों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां पर्याप्त जगह, वेंटिलेशन, सुरक्षित निकास और अग्निशमन व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। संगठन का कहना है कि कई संस्थान बेसमेंट और बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं जो राष्ट्रीय भवन संहिता और स्थानीय निकायों के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
फेमा ने शिक्षा मंत्रालय की 2024 की कोचिंग सेंटर विनियमन संबंधी गाइडलाइंस और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के प्रावधानों काे सख्ती से लागू कराने की मांग की है। फेमा ने स्थानीय नगर निगम, अग्निशमन विभाग और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के प्रतिनिधियों की संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर सभी प्रमुख मेडिकल कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण कराने का सुझाव दिया है। सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी पाए जाने पर संस्थान प्रबंधन और भवन मालिकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की गई है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने और बार-बार उल्लंघन करने वाले संस्थानों का पंजीकरण रद्द करने की भी मांग की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल स्नातकों का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में नीट पीजी, एफएमजीई और आईएनआई सीईटी जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की खामियों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
फेमा के अनुसार हर वर्ष हजारों मेडिकल छात्र भारी फीस चुकाने के बावजूद ऐसे कोचिंग केंद्रों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां पर्याप्त जगह, वेंटिलेशन, सुरक्षित निकास और अग्निशमन व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। संगठन का कहना है कि कई संस्थान बेसमेंट और बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं जो राष्ट्रीय भवन संहिता और स्थानीय निकायों के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
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फेमा ने शिक्षा मंत्रालय की 2024 की कोचिंग सेंटर विनियमन संबंधी गाइडलाइंस और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के प्रावधानों काे सख्ती से लागू कराने की मांग की है। फेमा ने स्थानीय नगर निगम, अग्निशमन विभाग और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के प्रतिनिधियों की संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर सभी प्रमुख मेडिकल कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण कराने का सुझाव दिया है। सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी पाए जाने पर संस्थान प्रबंधन और भवन मालिकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की गई है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने और बार-बार उल्लंघन करने वाले संस्थानों का पंजीकरण रद्द करने की भी मांग की है।
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