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बच्चों को दूध पिलाने वाली बोतलें हैं खतरनाक

Sat, 01 Nov 2014 09:18 AM IST
Updated Sat, 01 Nov 2014 09:18 AM IST
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Feeding bottles containing dangerous.

अगर आप अपने बच्चे को बोलत से दूध से पिलाते हैं तो सावधान होने की जरूरत है। संभव है कि इसके जरिये आपके बच्चे की शरीर में हानिकारक रसायन पहुंच रहा हो। इससे बच्चों में हार्मोनल गड़बड़ी हो सकती है। इसका खुलासा टॉक्सिक लिंक के एक अध्ययन से हुआ है।

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रिपोर्ट बताती है कि भारत में बच्चों के लिए बनने वाली दूध की बोलतों को बिसफिनॉल-ए (बीपीए) से बनाया जाता है। बिसफिनॉल-ए कार्बनिक कपाउंड है। दूध के संपर्क में आने से यह उसमें घुल जाता है। दूषित दूध के सेवन का असर बच्चे पर पड़ता है।
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उसके शरीर में हार्मोन्स का स्राव अनियमित हो जाता है। इससे मानसिक और शारीरिक बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। टॉक्सिक लिंक ने अध्ययन के लिए दिल्ली-एनसीआर, उड़ीसा के बारीपदा व मध्य प्रदेश के भोपाल से बेतरतीब ढंग से सैंपल उठाया था।
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इसमें से 78.5 फीसदी नमूनों में बीपीए की मात्रा बहुत ज्यादा रही। कई बोतलों में इसका स्तर 9.8 पार्ट्स/मिलियन (पीपीएम) रहा। खास बात यह कि जिन बोतलों को निर्माता बीपीए मुक्त बताते हैं उनमें से पचास फीसदी में बीपीए की मात्रा यूरोपीय संघ द्वारा तय सीमा 0.6 पीपीएम से ज्यादा मिली।

निदेशक रवि अग्रवाल के मुताबिक, रिपोर्ट से नीति निर्माताओं को इस दिशा में कारगर कदम उठाने में मदद मिलेगी। साथ ही दूध बनाने वाली कंपनियों के लिए भी चेतावनी होगा। फिर भी, मामला बेहद संवदेनशील होने से रोकने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए।

फैक्ट फाइल: दूध में होता घुला रहता है एक खतरनाम वायरस

Feeding bottles containing dangerous.

- 78.5 फीसदी नमूनों में बीपीए बेहद ज्यादा। अधिकतम मात्रा 9.8 पीपीए। यूरोपीय संघ का मानक 0.6 पीपीएम।
- बीपीए मुक्त बोतलों के पचास फीसदी में बीपीए यूरोपीय मानक से ज्यादा।
- दुनिया के कई देशों में दूध पिलाने वाली बोतलों में बीपीए के इस्तेमाल प्रतिबंधित।

- बीपीए से हार्मोन का स्राव होता प्रभावित, मानसिक व शारीरिक विकास पर पर पड़ता असर।
- इससे हृदय रोग, यकृत में विषाक्तता, मधुमेह, मोटापा की आशंका बढ़ जाती है।

- जिन महिलाओं के खून में बीपीए की मात्रा ज्यादा होती है, उनमें गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है।
- बोतल को धोने, गरम करने या ब्रश से साफ करने के दौरान बीपीए बाहर निकल आता है और दूध को दूषित कर देता है।

प्रमुख दुष्प्रभाव
- हृदय रोग, यकृत में विषाक्तता, चयापचयी लक्षण (मधुमेह मोटापा) और बीपीए के बीच सहसंबंध है।
- जन्म से पहले बीपीए से जुड़ा जोखिम तीन साल की उम्र में लड़कियों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
- लड़कों में इसका दुष्प्रभाव अवसाद और चिंता के रूप में सामने आ सकता है।

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