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कमाने वाली मां हो फिर भी भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पिता नहीं बच सकता : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Dec 2025 06:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया कि पिता अपनी नाबालिग संतानों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से तब भी नहीं बच सकता, जब मां कमाती हो या उसकी आय अधिक हो। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने कहा कि मां का काम करना पिता की प्राथमिक जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता। अदालत ने पिता द्वारा कम आय दिखाने के प्रयास को खारिज करते हुए आय की पारदर्शी जानकारी देने पर जोर दिया।

पति ने दावा किया था कि उसकी मासिक आय मात्र 9,000 रुपये है, जबकि उसके आयकर रिटर्न (आईटीआर) में सालाना 25 लाख रुपये तक की आय दर्ज थी। अदालत ने इसे आय छिपाने का प्रयास मानते हुए सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का हवाला दिया, जिसमें भरण-पोषण मामलों में आय की पूरी जानकारी देना अनिवार्य बताया गया है। अदालत ने तीन नाबालिग बच्चों के लिए अंतरिम भरण-पोषण राशि को 30,000 रुपये प्रति माह से घटाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया। यह फैसला मां की 34,000 रुपये मासिक आय और उसकी कमाई व देखभाल की दोहरी जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर किया गया। अदालत ने कहा कि कामकाजी मां को शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से थकाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जबकि पिता आय छिपाकर जिम्मेदारी से बचता रहे।
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