किसानों ने रुकवाया मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे का काम, मुआवजे पर अड़े महरौली के लोग
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर निर्माण कार्य शुरू करने पहुंची एनएचएआई टीम का महरौली के किसानों ने विरोध किया। मशीनों के सामने खड़े होकर किसानों ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाती है तब तक निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। विरोध में नारेबाजी होती देख एनएचएआई टीम को वापस लौटना पड़ा। उधर, किसानों ने कहा कि सारे मामले पर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। प्रशासन में बैठक होती है तो किसानों को आश्वासन दिया जाता है कि जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती है तब तक निर्माण नहीं शुरू होगा। अब पीछे से पुलिस फोर्स भेजकर निर्माण कार्य को शुरू कर दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि इस मामले को शुक्रवार को डीएम के सामने उठाया जाएगा।
किसान अनुज चौधरी ने बताया है कि बुधवार देररात से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। जैसे ही किसानों को पता चला तो एकत्र होकर मौके पर पहुंचे। किसानों की संख्या अधिक देखकर उन्होंने निर्माण कार्य रोक लिया। किसानों की तरफ से स्पष्ट किया गया कि प्रशासन की तरफ से कमेटी इसी शर्त पर गठित की गई थी कि जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती है, निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। अब निर्माण शुरू कर प्रशासन और एनएचएआई अपने वादे से मुकर रही है।
अनुज चौधरी ने कहा कि प्रशासन और एनएचएआई की जांच में लगभग साफ हो चुका है कि 2063 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है। किसान विजय पाल चौधरी ने कहा कि निर्माण शुरू करने के विरोध में हम लोग एडीएम सिटी से मिलने भी गए थे लेकिन वो मिले नहीं। अब शुक्रवार को इस मामले को प्रशासन के समक्ष रखा जाएगा। क्योंकि यह सीधे तौर पर किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रशासन के साथ बैठक में कुछ और तय होती है और धरातल पर कुछ दूसरा काम हो रहा होता है। इस तरह की दोहरी वार्ता के साथ किसानों के साथ समाधान के लिए वार्ता नहीं की जा सकती।
महरौली का असल विवाद
यूपी गेट से डासना के बीच करीब 19 किलोमीटर के 16 लेन एक्सप्रेस-वे का निर्माण हो रहा है। इसके लिए दोनों तरह सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसी चरण में पड़ने वाले महरौली गांव के किसानों का कहना है कि उनका यहां पर दो जगह निर्धारित जमीन से ज्यादा एनएचएआई ने कब्जा ली है। जबकि एनएचएआई की तर्क है कि वर्ष 2016 में जितनी सड़क पीडब्ल्यूडी ने हैंडओवर की थी। उस पर कब्जा लिया गया है। बीते दिनों विवाद इतना बढ़ गया कि किसानों को पुलिस कवि नगर थाने ले आए। इसके बाद प्रशासन ने तहसील, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी विभाग की संयुक्त टीम गठित की, जो जांच कर चुकी है लेकिन अभी रिपोर्ट देनी बाकी है।