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सिंघु बॉर्डरः कुछ इस तरह किसान मोदी सरकार तक पहुंचा रहे हैं अपने 'मन की बात'
Tue, 19 Jan 2021 07:34 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 19 Jan 2021 07:34 PM IST
सार
रोज करीब 500 से ज्यादा लोग सुबह से शाम तक पोस्टर पर सरकार के लिए संदेश, किसानों के समर्थन और उनकी हौसला अफजाई में शायरी और सरकार के खिलाफ संदेश लिखकर अपनी सामने रखते हैं...
रोज करीब 500 से ज्यादा लोग सुबह से शाम तक पोस्टर पर सरकार के लिए संदेश, किसानों के समर्थन और उनकी हौसला अफजाई में शायरी और सरकार के खिलाफ संदेश लिखकर अपनी सामने रखते हैं...
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Poster wall at Singhu Border
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
सिंघु बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसान संगठन मोदी सरकार तक अपने मन बात की पहुंचाने के लिए वार्ता के साथ-साथ कई नए तरीके भी अपना रहे हैं। कोई धरना स्थल पर नारे लगा रहा है तो कोई नारे लिख अपनी बात रख रहा है। किसानों ने अपनी बात रखने के लिए बॉर्डर पर एक अस्थाई पोस्टर वॉल तैयार की है। इस वॉल पर लोग पोस्टर चिपका कर अपनी बात रख रहे हैं।
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किसानों के लिए पोस्टर तैयार करने वाले समरदीप सिंह ने अमर उजाला को बताया कि आंदोलन में किसानों का समर्थन करने के लिए आने वाले लोग पोस्टर के जरिए अपने दिल की बात कह रहे हैं। रोज करीब 500 से ज्यादा लोग सुबह से शाम तक पोस्टर पर सरकार के लिए संदेश, किसानों के समर्थन और उनकी हौसला अफजाई में शायरी और सरकार के खिलाफ संदेश लिखकर अपनी सामने रखते हैं।
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उन्होंने आगे बताया कि हम समर्थन देने के लिए आ रहे लोगों को मुफ्त में पोस्टर मुहैया करवाते हैं। इसके अलावा उनके बताए गए संदेश भी पोस्टर पर लिखते है। कुछ लोग पोस्टरों को लेकर धरना-स्थल पर घूमते है तो कुछ लोग अपनी कार पर इसे लगा लेते है। वहीं अधिकांश लोग पोस्टर वॉल पर ही इसे लगा देते हैं। अमतौर पर पंजाबी भाषा में ही लोग अपने संदेश लिखते हैं। एक या दो दिन के बाद हम इन पोस्टरों को बदल देते हैं। ऐसे में हर दिन वालों को अपने संदेश लिखने और लगाने की जगह मिल जाती है।
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समरदीप ने आगे बताया कि जो भी लोग हमसे पोस्टर लेते हैं हम पहले उनसे निवेदन करते हैं कि संदेश मर्यादित भाषा में होना चाहिए। सरकार के खिलाफ भी अगर लिखना है तो सभ्य भाषा का ही इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि यहां बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी आती हैं, वे भी अपने दिल की बात यहां लिखकर किसानों का समर्थन करते हैं।