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Faridabad News: रावण के पुतले बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहीं महिलाएं
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कन्नौज से बच्चों के साथ फरीदाबाद पहुंचीं रूबी, चार साल से कर रहीं काम
पांच से 20 फीट तक के पुतले तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दशहरा आते ही शहर में रावण के पुतलों की मांग बढ़ने लगती है। इस बार इन पुतलों को तैयार करने और बेचने के काम में जुटी महिलाएं अपनी मेहनत से महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश कर रही हैं। परिवार और घर छोड़कर दूसरे शहरों में पहुंचीं ये महिलाएं खुद रावण के पुतले तैयार करती हैं और उन्हें बेचकर परिवार की आजीविका चलाती हैं।
हालांकि, इस बार बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होने से उनके चेहरे पर चिंता भी नजर आ रही है। कन्नौज से अपने बच्चों के साथ फरीदाबाद पहुंचने वाली रूबी पिछले चार वर्षों से रावण के पुतले बनाने का काम कर रही हैं। दशहरा से करीब चार महीने पहले वह शहर पहुंच जाती हैं। सड़क किनारे अस्थायी ठिकाना बनाकर और नीलम पुल के नीचे झोपड़ी में रहकर परिवार के साथ पुतले तैयार करती हैं। उनके लिए यह काम सिर्फ त्योहार तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार की जरूरतें पूरी करने का जरिया भी है।
मेहनत के साथ उम्मीद भी कायम
रूबी ने बताया कि रावण के पुतले बनाने में कई महीने की मेहनत लगती है। आकार के हिसाब से पांच फीट से लेकर 20 फीट तक के पुतले तैयार किए जाते हैं। बड़े पुतलों को बनाने में ज्यादा समय और मेहनत लगती है। इनकी कीमत करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने बताया कि दशहरा में अब केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन इस बार ग्राहक पहले की तरह खरीदारी नहीं कर रहे हैं। इससे कमाई को लेकर चिंता बनी हुई है। इन महिलाओं की मेहनत बताती है कि हुनर और आत्मनिर्भर बनने का जज्बा किसी परिस्थिति का मोहताज नहीं होता। दशहरा पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले तैयार करने वाली ये महिलाएं खुद संघर्ष से लड़कर अपने परिवार का सहारा बन रही हैं।
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महिलाओं से बातचीत
दूसरे शहर में आकर रहना आसान नहीं है। परिवार के साथ अस्थायी ठिकाने पर रहकर काम करना पड़ता है। - रूबी, कन्नौज
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चार माह पहले ही यहां आ जाते हैं और रावण के पुतले बनाने का कार्य करने के लिए सामान आदि जुटा लेते हैं। - सान्या, कन्नौज
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त्योहार के दौरान अच्छी बिक्री होने की उम्मीद रहती है, ताकि बच्चों की जरूरतें पूरी की जा सकें। - शीलम, फरीदाबाद
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पांच से 20 फीट तक के पुतले तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दशहरा आते ही शहर में रावण के पुतलों की मांग बढ़ने लगती है। इस बार इन पुतलों को तैयार करने और बेचने के काम में जुटी महिलाएं अपनी मेहनत से महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश कर रही हैं। परिवार और घर छोड़कर दूसरे शहरों में पहुंचीं ये महिलाएं खुद रावण के पुतले तैयार करती हैं और उन्हें बेचकर परिवार की आजीविका चलाती हैं।
हालांकि, इस बार बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होने से उनके चेहरे पर चिंता भी नजर आ रही है। कन्नौज से अपने बच्चों के साथ फरीदाबाद पहुंचने वाली रूबी पिछले चार वर्षों से रावण के पुतले बनाने का काम कर रही हैं। दशहरा से करीब चार महीने पहले वह शहर पहुंच जाती हैं। सड़क किनारे अस्थायी ठिकाना बनाकर और नीलम पुल के नीचे झोपड़ी में रहकर परिवार के साथ पुतले तैयार करती हैं। उनके लिए यह काम सिर्फ त्योहार तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार की जरूरतें पूरी करने का जरिया भी है।
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मेहनत के साथ उम्मीद भी कायम
रूबी ने बताया कि रावण के पुतले बनाने में कई महीने की मेहनत लगती है। आकार के हिसाब से पांच फीट से लेकर 20 फीट तक के पुतले तैयार किए जाते हैं। बड़े पुतलों को बनाने में ज्यादा समय और मेहनत लगती है। इनकी कीमत करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने बताया कि दशहरा में अब केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन इस बार ग्राहक पहले की तरह खरीदारी नहीं कर रहे हैं। इससे कमाई को लेकर चिंता बनी हुई है। इन महिलाओं की मेहनत बताती है कि हुनर और आत्मनिर्भर बनने का जज्बा किसी परिस्थिति का मोहताज नहीं होता। दशहरा पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले तैयार करने वाली ये महिलाएं खुद संघर्ष से लड़कर अपने परिवार का सहारा बन रही हैं।
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महिलाओं से बातचीत
दूसरे शहर में आकर रहना आसान नहीं है। परिवार के साथ अस्थायी ठिकाने पर रहकर काम करना पड़ता है। - रूबी, कन्नौज
चार माह पहले ही यहां आ जाते हैं और रावण के पुतले बनाने का कार्य करने के लिए सामान आदि जुटा लेते हैं। - सान्या, कन्नौज
त्योहार के दौरान अच्छी बिक्री होने की उम्मीद रहती है, ताकि बच्चों की जरूरतें पूरी की जा सकें। - शीलम, फरीदाबाद