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Faridabad News: दवाइयों के लिए भटक रहे क्षय रोग के मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एक ओर सरकार साल 2025 में तक देश को क्षयरोग से मुक्त करना चाहती है। वहीं, शहर के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिले में करीब 4,973 क्षय रोगी हैं। जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन दवाइयों व जांच के लिए लगभग 50 लोग पहुंचते हैं। डॉक्टर से परामर्श के बाद मरीजों को दवाइयों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा सीएचसी पीएचसी पर भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। क्षयरोग की दवाइयां लेने अस्पताल पहुंचे राम नारायण सिंह ने बताया कि पत्नी को टीबी है, पिछले दो दिनों से सीएचसी और बीके अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। बीके में दो दिनों की कुछ दवाइयां मिली हैं, फिर दो दिन बाद बुलाया है। बार-बार ड्यूटी छोड़कर आने से पैसे कटते हैं, आर्थिक तंगी के कारण बाहर से खरीद भी नहीं सकते हैं।
सभी अधिकारी मरीजों को लेंगे गोद
जिले में करीब 4,973 क्षय रोगी हैं, अस्पताल की ओर से इलाज चल रहा है। इनमें से 2100 मरीजों को निजी अस्पताल ने गोद लिया है। वहीं उप सिविल सर्जन डॉ. रिचा बत्रा ने 5, महेंद्र गोयल ने 5, सीएमओ विनय गुप्ता ने 10, सुभाष गहलोत ने 2, डॉ. एमपी सिंह ने 5 और डॉ. गजराज ने 2 मरीजों को गोद लिया है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सरकारी विभागों के जिला अधिकारी और संगठन, गैर सरकारी संगठन टीबी रोगी को गोद लेकर रोगियों को कम से कम 6 महीने से 3 साल तक के लिए पोषण आहार सहायता प्रदान करना है। उपायुक्त कार्यालय की ओर से 50 मरीजों को गोद लिया गया है।
अधिकारी से बातचीत
दो दिन पहले ही सभी दवाइयां अस्पताल में आई हैं, मरीजों को सभी दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। दो दिन बाद मरीजों को डाइट भी दी जाएगी। - डॉ. रिचा बत्रा, उप सिविल सर्जन।
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फरीदाबाद। एक ओर सरकार साल 2025 में तक देश को क्षयरोग से मुक्त करना चाहती है। वहीं, शहर के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिले में करीब 4,973 क्षय रोगी हैं। जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन दवाइयों व जांच के लिए लगभग 50 लोग पहुंचते हैं। डॉक्टर से परामर्श के बाद मरीजों को दवाइयों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा सीएचसी पीएचसी पर भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। क्षयरोग की दवाइयां लेने अस्पताल पहुंचे राम नारायण सिंह ने बताया कि पत्नी को टीबी है, पिछले दो दिनों से सीएचसी और बीके अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। बीके में दो दिनों की कुछ दवाइयां मिली हैं, फिर दो दिन बाद बुलाया है। बार-बार ड्यूटी छोड़कर आने से पैसे कटते हैं, आर्थिक तंगी के कारण बाहर से खरीद भी नहीं सकते हैं।
सभी अधिकारी मरीजों को लेंगे गोद
जिले में करीब 4,973 क्षय रोगी हैं, अस्पताल की ओर से इलाज चल रहा है। इनमें से 2100 मरीजों को निजी अस्पताल ने गोद लिया है। वहीं उप सिविल सर्जन डॉ. रिचा बत्रा ने 5, महेंद्र गोयल ने 5, सीएमओ विनय गुप्ता ने 10, सुभाष गहलोत ने 2, डॉ. एमपी सिंह ने 5 और डॉ. गजराज ने 2 मरीजों को गोद लिया है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सरकारी विभागों के जिला अधिकारी और संगठन, गैर सरकारी संगठन टीबी रोगी को गोद लेकर रोगियों को कम से कम 6 महीने से 3 साल तक के लिए पोषण आहार सहायता प्रदान करना है। उपायुक्त कार्यालय की ओर से 50 मरीजों को गोद लिया गया है।
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अधिकारी से बातचीत
दो दिन पहले ही सभी दवाइयां अस्पताल में आई हैं, मरीजों को सभी दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। दो दिन बाद मरीजों को डाइट भी दी जाएगी। - डॉ. रिचा बत्रा, उप सिविल सर्जन।
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