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Faridabad News: तीन पीढ़ियों ने साझा किए अनुभव, रीति-रिवाज बदले पर त्योहार की भावनाएं वही

Thu, 06 Aug 2026 12:04 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 12:04 AM IST
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Three generations shared their experiences; customs have changed, but the spirit of the festival remains the same.
दादी की परंपरा, मां की सीख और बेटी की नई सोच, बदल रही तीज की तस्वीर
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सावन के साथ ही घरों में तीज की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कहीं मेहंदी की खुशबू है तो कहीं चूड़ियों की खनक। बदलते समय के साथ तीज मनाने के तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन इस त्योहार से जुड़ी भावनाएं आज भी पहले जैसी हैं। फरीदाबाद में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों की सोच से तीज की बदलती तस्वीर साफ नजर आ रही है।
पुरानी पीढ़ी के लिए तीज परंपरा, आस्था और रिश्तों का त्योहार रहा है। एनआईटी तीन निवासी कमला देवी बताती हैं कि उनके समय में तीज की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती थीं। महिलाएं एक साथ बैठकर लोकगीत गाती थीं, हाथों में मेहंदी लगाती थीं और झूलों की रौनक से घर-आंगन खिल उठता था। उन्होंने बताया कि उस समय त्योहारों का सबसे बड़ा आकर्षण परिवार और पड़ोस की महिलाओं का एक साथ मिलना होता था।
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मां की पीढ़ी ने इन परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ समय के बदलाव को भी अपनाया। सुषमा का कहना है कि आज महिलाओं की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं, लेकिन त्योहारों से जुड़ाव कम नहीं हुआ है। तीज अब भी परिवार के साथ खुशियां बांटने और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर देती है।
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वहीं, नई पीढ़ी की बेटियां तीज को अपने नए अंदाज में मना रही हैं। नेहा बताती हैं कि आज की लड़कियां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आधुनिक सोच को भी अपना रही हैं। मेहंदी, पारंपरिक परिधान और पूजा-पाठ के साथ वे त्योहार को अपनी पसंद के अनुसार खास बना रही हैं।

तीनों पीढ़ियों का मानना है कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन त्योहारों की मूल भावना हमेशा बनी रहनी चाहिए। फरीदाबाद में तीज आज भी परिवारों को जोड़ने, रिश्तों में मिठास बढ़ाने और संस्कृति को आगे बढ़ाने का माध्यम बनी हुई है। दादी की परंपरा, मां की सीख और बेटी की नई सोच मिलकर तीज को नया रंग दे रही है।
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