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Faridabad News: सबूतों की कमी से लूट-अपहरण केस में तीन आरोपी बरी
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- पीड़ित नहीं कर सका पहचान, जांच में खामियों पर कोर्ट का सख्त रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। करीब पांच साल पुराने लूट और अपहरण मामले में अदालत ने तीन युवकों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने पांच मई को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा। मामले में सबसे अहम गवाह शिकायतकर्ता यजुविंदर शर्मा ही अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। उन्होंने बयान दिया कि घटना के समय आरोपियों के चेहरे ढके हुए थे, इसलिए वे किसी को पहचान नहीं पा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट में मौजूद युवक घटना में शामिल नहीं थे।
अदालत ने अपने फैसले में जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई, बरामदगी के दौरान स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किए गए और केस से जुड़े दस्तावेज भी पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके अलावा गवाहों के बयानों में विरोधाभास भी सामने आए, जिससे अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने बालराम, सुनील और तजेंदर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। करीब पांच साल पुराने लूट और अपहरण मामले में अदालत ने तीन युवकों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने पांच मई को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा। मामले में सबसे अहम गवाह शिकायतकर्ता यजुविंदर शर्मा ही अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। उन्होंने बयान दिया कि घटना के समय आरोपियों के चेहरे ढके हुए थे, इसलिए वे किसी को पहचान नहीं पा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट में मौजूद युवक घटना में शामिल नहीं थे।
अदालत ने अपने फैसले में जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई, बरामदगी के दौरान स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किए गए और केस से जुड़े दस्तावेज भी पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके अलावा गवाहों के बयानों में विरोधाभास भी सामने आए, जिससे अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने बालराम, सुनील और तजेंदर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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