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बीके अस्पताल की लैब में डेंगू किट नहीं, कैसे होगी रोकथाम
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फरीदाबाद। जिले में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। रोजाना तीन से पांच नए मरीज सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अधिकारी डेंगू रोकथाम के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं लेकिन सिविल अस्पताल बीके परिसर स्थित आईडीएसपी लैब में तीन दिनों से डेंगू की जांच के लिए टेस्टिंग किट उपलब्ध नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को निजी लैब में भेजा रहा है जिससे जांच प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग के डेंगू रोकथाम के दावे फेल साबित हो रहे हैं। जिले में डेंगू ने पांच साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। पांच साल बाद जिले में डेंगू के सबसे अधिक मरीज सामने आए हैं। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के तीन नए मामलों की पुष्टि की। जिला स्तर पर सिविल अस्पताल बीके सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां दूर दराज से लोग डेंगू जांच के लिए पहुंचते हैं लेकिन, हालात यह हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को भी बाहर से जांच करानी पड़ रही है। टेस्टिंग किट नहीं होने का वास्तविक लाभ निजी अस्पतालों और लैब संचालकों को हो रहा है। निजी अस्पताल एनएस-1 किट से डेंगू की पुष्टि करके डेंगू रोगियों को अपने यहां भर्ती कर इलाज कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग केवल एलाईजा व आईजीएम जांच की रिपोर्ट को वैध मानता है। स्वास्थ्य विभाग के पास यह दोनों ही किट उपलब्ध नहीं हैं। जिले में डेंगू का कहर बढ़ने के साथ ही प्लेटलेट्स की कमी हो गई है। ऐसे में मरीजों के तीमारदारों को प्लेटलेट्स के लिए दिल्ली के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पास पुणे से टेस्टिंग किट आती है। इसके लिए एक सप्ताह पहले किट खत्म होने से पूर्व ऑर्डर कर दिया गया था। किट हमारे पास जल्द पहुंच जाएगी। अब लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
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- डॉ. राम भगत, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग के डेंगू रोकथाम के दावे फेल साबित हो रहे हैं। जिले में डेंगू ने पांच साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। पांच साल बाद जिले में डेंगू के सबसे अधिक मरीज सामने आए हैं। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के तीन नए मामलों की पुष्टि की। जिला स्तर पर सिविल अस्पताल बीके सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां दूर दराज से लोग डेंगू जांच के लिए पहुंचते हैं लेकिन, हालात यह हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को भी बाहर से जांच करानी पड़ रही है। टेस्टिंग किट नहीं होने का वास्तविक लाभ निजी अस्पतालों और लैब संचालकों को हो रहा है। निजी अस्पताल एनएस-1 किट से डेंगू की पुष्टि करके डेंगू रोगियों को अपने यहां भर्ती कर इलाज कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग केवल एलाईजा व आईजीएम जांच की रिपोर्ट को वैध मानता है। स्वास्थ्य विभाग के पास यह दोनों ही किट उपलब्ध नहीं हैं। जिले में डेंगू का कहर बढ़ने के साथ ही प्लेटलेट्स की कमी हो गई है। ऐसे में मरीजों के तीमारदारों को प्लेटलेट्स के लिए दिल्ली के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के पास पुणे से टेस्टिंग किट आती है। इसके लिए एक सप्ताह पहले किट खत्म होने से पूर्व ऑर्डर कर दिया गया था। किट हमारे पास जल्द पहुंच जाएगी। अब लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
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- डॉ. राम भगत, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी