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Faridabad News: सूरजकुंड मेले में उमड़ी रिकॉर्ड भीड़, कारोबार चमका और संस्कृति का रंग गहराया

Sun, 08 Feb 2026 11:29 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:29 PM IST
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Record crowds gathered at the Surajkund fair, boosting business and enhancing cultural heritage.
सूरजकुंड मेले में उमड़ी रिकॉर्ड भीड़, कारोबार चमका और संस्कृति का रंग गहराया
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का आकर्षण इस साल नए शिखर पर पहुंचता दिख रहा है। रविवार को मेला परिसर लोगों की उत्साही भीड़ से खचाखच भरा रहा और पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल बना रहा। अनुमान है कि रविवार को करीब 1.8 से 2 लाख लोगों ने मेले का भ्रमण किया जो पहले रविवार के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक है। परिवारों, युवाओं और विदेशी पर्यटकों की बड़ी मौजूदगी ने सूरजकुंड को एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया।

रविवार दोपहर के बाद मेले के तीनों प्रवेश द्वारों पर लंबी कतारें दिखीं। प्रवेश द्वार नंबर-1 पर सबसे अधिक भीड़ रही, जिसके बाद पुलिस और आयोजन समिति ने लोगों को अन्य द्वारों की ओर सुचारू रूप से डायवर्ट किया। सुरक्षा जांच के कारण लोगों को औसतन 25 से 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन व्यवस्था शांतिपूर्ण रही। शाम को वापसी के समय सूरजकुंड रोड और बल्लभगढ़ लिंक रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ा फिर भी ट्रैफिक पुलिस ने सुचारू प्रबंधन किया।
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शिल्पकारों के चेहरे खिले, कारोबार में उछाल

भीड़ बढ़ते ही मेले का आर्थिक माहौल भी गुलजार हो गया। शिल्पकारों के मुताबिक रविवार को बिक्री शनिवार की तुलना में लगभग 60-70 फीसदी अधिक रही। बनारसी साड़ियां, कश्मीरी शॉल, लकड़ी की नक्काशी, पीतल-धातु शिल्प और घर की सजावटी वस्तुओं की सबसे ज्यादा मांग दिखी। खाने-पीने के स्टॉल पर भी लंबी कतारें लगी रहीं, खासकर राजस्थानी, पंजाबी और उत्तर-पूर्वी व्यंजनों के काउंटरों पर।
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युवाओं और विदेशी पर्यटकों की मजबूत मौजूदगी

मेले में स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं के समूह बड़ी संख्या में नजर आए। कुल दर्शकों में लगभग 35 फीसदी युवा वर्ग का अनुमान लगाया जा रहा है। दिल्ली के नजदीक होने के कारण जर्मनी, फ्रांस, जापान और कोरिया समेत कई देशों के पर्यटक भी पहुंचे। उन्होंने हस्तशिल्प, लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की। फरीदाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा से बसों और मेट्रो कनेक्टिविटी के कारण लोगों की आवाजाही आसान रही।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा बल

मेले में बढ़ती भीड़ का सीधा लाभ आसपास के होटल, ऑटो-टैक्सी चालकों और स्थानीय दुकानदारों को मिला। व्यापारियों के अनुसार मेले के दौरान उनके कारोबार में 30-40 फीसदी तक की वृद्धि देखी जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक रविवार को पार्किंग से लगभग 12-14 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

आगे और बढ़ेगा उत्साह

प्रशासन का मानना है कि आने वाले दिनों में खासकर अगले वीकेंड पर दर्शकों की संख्या 2.2 लाख तक पहुंच सकती है। इसके लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग, शटल बस सेवा और बेहतर ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है। सूरजकुंड मेला इस बार सिर्फ खरीदारी का बाजार नहीं बल्कि संस्कृति, कला और सामुदायिक जुड़ाव का बड़ा मंच बनकर उभरा है जहां हर उम्र, हर वर्ग और हर देश के लोग एक साथ उत्सव का हिस्सा बन रहे हैं।

उम्मीद से कहीं ज्यादा खरीदार उमड़े हैं। लोगों ने परिवार सहित पहुंचकर विभिन्न सामानों की खरीदारी की। उससे उनको काफी फायदा मिला है।
- डेविड ठाकुर, शिल्पकार

शनिवार को हुए हादसे के बाद उनको उम्मीद नहीं थी कि इतनी ज्यादा भीड़ देखने को मिलेगी। स्टालों पर कला के कद्रदानों की भीड़ लगी रही। उनकी दुकान पर रविवार को अच्छी ब्रिकी हुई।


- हसीब, शिल्पकार

रविवार को महिलाओं ने बनारसी साड़ी,कश्मीरी शाल, घर का सजावटी सामान और सजने-संवरने की वस्तुओं की जमकर खरीदारी की।
- संतोष, शिल्पकार

दो हादसे के बाद शिल्पकारों को लगा था कि अब उनके सामान को खरीदने के लिए लोग नहीं आएंगे। लेकिन रविवार को सुबह 10 बजे दुकान को खोलते ही लोगों की भीड़ देखकर उनके चेहरे पर खुशी देखने को मिली।

- सौरभ , शिल्पकार


हादसे के बाद डर तो लग रहा था लेकिन अंतरराष्ट्रीय मेले को देखने का अलग ही मजा है। इसलिए वह अपने परिवार के साथ रविवार को मेला देखने के लिए आए।
- हेमंत

हादसे के बारे में उनको सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली थी। लेकिन रविवार को कॉलेज की छुट्टी होने की वजह से वह अपने दोस्तों के साथ मेला देखने के लिए आए।
- वंश
वह दोस्तों के साथ झूला झूलने के लिए आए थे, लेकिन हादसे के बाद झूला परिसर को बंद कर दिया गया। जिस वजह से वह मेला देखकर वापस जा रहे है।
- आकाश

हादसे के बाद उनको डर तो लग रहा था लेकिन वह दोपहर के बाद मेला परिसर में दोस्तों के साथ पहुंचे और मेले का आनंद लिया।
- आशीष
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