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डस्ट पोर्टल से प्रदूषण स्तर पर होगी नजर, 500 मीटर से अधिक के निर्माण स्थलों पर प्रदूषण रोकने की तैयारी को ऑनलाइन देख सकेंगे उच्चाधिकारी
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Pollution level will be monitored from dust portal
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फरीदाबाद (दुर्गेश झा)। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) फरवरी के पहले हफ्ते तक अपना डस्ट पोर्टल लांच करेगा। इसकी तैयारी की जा रही है। फिलहाल पोर्टल का ट्रायल किया जा रहा है। इससे फरीदाबाद समेत प्रदेश के सभी जिलों को फायदा होगा। उच्चाधिकारियों को प्रदूषण की रोकथाम की योजना बनाने में आसानी होगी। साथ ही निर्माणाधीन स्थलों पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए क्या तैयारी है, इसकी भी जानकारी आसानी से ऑनलाइन ली जाएगी।
फरीदाबाद में पिछले साल के नवंबर से ही प्रदूषण का स्तर खराब है। मौसम वैज्ञानिक इसका मुख्य कारण मौसम के साथ टूटी सड़कों को मान रहे हैं। लेकिन जानकार शहर में प्रदूषण को बढ़ाने का जिम्मेदार निर्माणाधीन इकाइयों को भी मानते हैं। वहां पर समुचित व्यवस्था नहीं होना इसका कारण है। जब एचएसपीसीबी द्वारा दबाव बनाया जाता है तो बस थोड़ा बहुत पानी का छिड़काव करते हैं। इस लापरवाही से शहर की आबोहवा अक्सर खराब ही रहती है। अधिकारियों का कहना है कि जो इकाई 500 स्क्वायर मीटर से अधिक क्षेत्र में निर्माण कार्य करा रहे हैं, उन्हें पोर्टल पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए पूरी जानकारी देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि निर्माण कार्य के दौरान धूल को हवा में घुलने से रोकने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। 15-15 दिन यानी महीने दो बार इसकी जानकारी पोर्टल पर देना अनिवार्य होगा। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लगाने होंगे सेंसर, देख सकेंगे ऑॅनलाइन
क्षेत्रीय अधिकारी स्मिता कनोडिया ने बताया कि निर्माण इकाइयों को पीएम 2.5 व पीएम 10 के भी सेंसर लगाने होंगे, जिससे अधिकारियों को वहां की प्रदूषण स्तर की जानकारी जुटाने में आसानी हो। पोर्टल के माध्यम से अधिकारी प्रदेश के किसी भी निर्माण स्थल का ऑनलाइन जायजा ले सकते हैं। वह 24 घंटे में कभी भी ऑनलाइन वीडियो देखकर प्रदूषण को रोकने की तैयारियों को देख सकते हैं।
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फरीदाबाद में पिछले साल के नवंबर से ही प्रदूषण का स्तर खराब है। मौसम वैज्ञानिक इसका मुख्य कारण मौसम के साथ टूटी सड़कों को मान रहे हैं। लेकिन जानकार शहर में प्रदूषण को बढ़ाने का जिम्मेदार निर्माणाधीन इकाइयों को भी मानते हैं। वहां पर समुचित व्यवस्था नहीं होना इसका कारण है। जब एचएसपीसीबी द्वारा दबाव बनाया जाता है तो बस थोड़ा बहुत पानी का छिड़काव करते हैं। इस लापरवाही से शहर की आबोहवा अक्सर खराब ही रहती है। अधिकारियों का कहना है कि जो इकाई 500 स्क्वायर मीटर से अधिक क्षेत्र में निर्माण कार्य करा रहे हैं, उन्हें पोर्टल पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए पूरी जानकारी देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि निर्माण कार्य के दौरान धूल को हवा में घुलने से रोकने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। 15-15 दिन यानी महीने दो बार इसकी जानकारी पोर्टल पर देना अनिवार्य होगा। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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लगाने होंगे सेंसर, देख सकेंगे ऑॅनलाइन
क्षेत्रीय अधिकारी स्मिता कनोडिया ने बताया कि निर्माण इकाइयों को पीएम 2.5 व पीएम 10 के भी सेंसर लगाने होंगे, जिससे अधिकारियों को वहां की प्रदूषण स्तर की जानकारी जुटाने में आसानी हो। पोर्टल के माध्यम से अधिकारी प्रदेश के किसी भी निर्माण स्थल का ऑनलाइन जायजा ले सकते हैं। वह 24 घंटे में कभी भी ऑनलाइन वीडियो देखकर प्रदूषण को रोकने की तैयारियों को देख सकते हैं।
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