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Faridabad News: फ्लेवर्ड धुएं की लत खतरनाक पुलिस चला रही अभियान
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कैलाश गठवाल
फरीदाबाद। पुलिस ने शहर में चल रहे अवैध हुक्का बार के खिलाफ अभियान चला दिया है। पिछले दो दिनों में पुलिस ने छापा मारकर दो हुक्का बार बंद करा दिए, लेकिन शहर में 50 से ज्यादा हुक्का बार खुले हुए हैं। मोटी कमाई के लालच में हुक्का बार संचालक युवाओं के फेंफड़े फूंकने में भी गुरेज नहीं कर रहे। शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा में फ्लेवर हुक्का भी बैन कर दिया। दरअसल फ्लेवर हुक्का में होनी वाली कमाई संचालकों को इसे चोरी छिपे चलाने के लिए भी आकर्षित करती है। युवा पहले इसे शौक में शुरू करते हैं, बाद में इसके लत लग जाती है।
एक संचालक ने बताया कि हुक्का बार में काफी मुनाफा है। एक बार का हुक्का तैयार करने में मात्र 60 से 80 रुपये का खर्चा आता है। ग्राहक से इसके लिए 700 रुपये से 1500 रुपये तक वसूले जाते हैं। हुक्के की बनावट और धुंआ निकालने की क्षमता के आधार पर दाम ऊपर नीचे किए जाते हैं। सारा माल दिल्ली से सप्लाई होता है। इसके लिए कॉइल, फ्लेवर, सिल्वर फॉइल और कुछ मात्रा में निकोटिन को मिलाकर एक हुक्का तैयार किया जाता है। करीब 30 से 45 मिनट तक हुक्के से धुंआ निकाल सकते हैं। इसमें नशा भी होता है। ट्यूशन सेंटर और कॉलेज के आसपास हुक्का बार काफी चलते हैं। यहां बच्चों को पेन हुक्का व पफ के नाम से पॉकेट हुक्का भी उपलब्ध कराया जाता है।
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पार्टी करने के लिए हुक्का बार बने पहली पसंद
युवा अपनी पार्टी करने के लिए हुक्का बार को ही पहली पसंद बना चुके हैं। यहां संचालक हुक्के के साथ-साथ डीजे, खाने पीने का सामान, बढि़या लाइटिंग के साथ प्राइवेट स्पेस भी उपलब्ध कराते हैं। इतना ही नहीं मांग के हिसाब से यहां शराब भी परोसी जाती है। इसका सीधा असर महंगे क्लब और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अहातों पर भी पड़ता है। हुक्का बार में युवतियां भी खूब जाती हैं। कुछ तो केवल सोशल साइट पर रील बनाकर डालने के लिए ही हुक्का बार में जाना पसंद करते हैं। यहां प्रत्येक घंटे के हिसाब से टेबल का चार्ज लिया जाता है। खाने पीने के सामान के दाम भी बाजार से ज्यादा होते हैं।
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फ्लेवर और हुक्के का डिजाइन बढ़ाता है दाम
हुक्का बार में पान फ्लेवर से लेकर कीवी, मिंट, मैंगो आदि का टेस्ट मिलता है। तम्बाकू सभी में एक जैसा होता है, बस फ्लेवर का फर्क है। इसके बाद हुक्के का डिजाइन में रशियन हुक्का, खलील हुक्का, पीटट आदि की मांग सबसे ज्यादा रहती है। कुछ हुक्के विदेश से भी मंगाए जाते हैं। हुक्का भरने के लिए अलग से कर्मचारी लगाया जाता है जो निकोटिन और फ्लेवर को मिलाकर एक तरल बनाता है। उसे सिल्वर फॉयल, चारकोल आदि के साथ भरकर धुंआ निकाला जाता है। संचालक से मुताबिक एक हुक्के से 100 सिगरेट के बराबर धुंआ निकलता है।
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दो दिन में दो हुक्का बार पर मारा छापा
पुलिस ने रविवार को ओल्ड फरीदाबाद शास्त्री कालोनी स्थित लखानी शोरूम के ऊपर चल रहे लेवल अप कैफे नाम के हुक्का बार में छापा मारकर बसेलवा काॅलोनी निवासी विशाल सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है। मौके पर चार हुक्का चिलम सहित बरामद हुए। जिसमें से दो हुक्का चालू हालत में थे। पुलिस को देखकर अन्य युवक मौके से फरार हो गए। शनिवार को पुलिस ने सेक्टर 16 में चल रहे कैफे 52 हुक्का बार में छापा मारकर एक युवक को गिरफ्तार किया था। कैफे मालिक बाढ़ मोहल्ला निवासी गुरुदत्त अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
99
हरियाणा में फ्लेवर हुक्का पूरी तरह से बैन है। फरीदाबाद पुलिस हुक्का बार के खिलाफ विशेष अभियान चलाने जा रही है। सभी थाना और क्राइम ब्रांच को हुक्का बार बंद कराने के आदेश दिए हैं। - राकेश आर्य, पुलिस आयुक्त्र
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फरीदाबाद। पुलिस ने शहर में चल रहे अवैध हुक्का बार के खिलाफ अभियान चला दिया है। पिछले दो दिनों में पुलिस ने छापा मारकर दो हुक्का बार बंद करा दिए, लेकिन शहर में 50 से ज्यादा हुक्का बार खुले हुए हैं। मोटी कमाई के लालच में हुक्का बार संचालक युवाओं के फेंफड़े फूंकने में भी गुरेज नहीं कर रहे। शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा में फ्लेवर हुक्का भी बैन कर दिया। दरअसल फ्लेवर हुक्का में होनी वाली कमाई संचालकों को इसे चोरी छिपे चलाने के लिए भी आकर्षित करती है। युवा पहले इसे शौक में शुरू करते हैं, बाद में इसके लत लग जाती है।
एक संचालक ने बताया कि हुक्का बार में काफी मुनाफा है। एक बार का हुक्का तैयार करने में मात्र 60 से 80 रुपये का खर्चा आता है। ग्राहक से इसके लिए 700 रुपये से 1500 रुपये तक वसूले जाते हैं। हुक्के की बनावट और धुंआ निकालने की क्षमता के आधार पर दाम ऊपर नीचे किए जाते हैं। सारा माल दिल्ली से सप्लाई होता है। इसके लिए कॉइल, फ्लेवर, सिल्वर फॉइल और कुछ मात्रा में निकोटिन को मिलाकर एक हुक्का तैयार किया जाता है। करीब 30 से 45 मिनट तक हुक्के से धुंआ निकाल सकते हैं। इसमें नशा भी होता है। ट्यूशन सेंटर और कॉलेज के आसपास हुक्का बार काफी चलते हैं। यहां बच्चों को पेन हुक्का व पफ के नाम से पॉकेट हुक्का भी उपलब्ध कराया जाता है।
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पार्टी करने के लिए हुक्का बार बने पहली पसंद
युवा अपनी पार्टी करने के लिए हुक्का बार को ही पहली पसंद बना चुके हैं। यहां संचालक हुक्के के साथ-साथ डीजे, खाने पीने का सामान, बढि़या लाइटिंग के साथ प्राइवेट स्पेस भी उपलब्ध कराते हैं। इतना ही नहीं मांग के हिसाब से यहां शराब भी परोसी जाती है। इसका सीधा असर महंगे क्लब और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अहातों पर भी पड़ता है। हुक्का बार में युवतियां भी खूब जाती हैं। कुछ तो केवल सोशल साइट पर रील बनाकर डालने के लिए ही हुक्का बार में जाना पसंद करते हैं। यहां प्रत्येक घंटे के हिसाब से टेबल का चार्ज लिया जाता है। खाने पीने के सामान के दाम भी बाजार से ज्यादा होते हैं।
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फ्लेवर और हुक्के का डिजाइन बढ़ाता है दाम
हुक्का बार में पान फ्लेवर से लेकर कीवी, मिंट, मैंगो आदि का टेस्ट मिलता है। तम्बाकू सभी में एक जैसा होता है, बस फ्लेवर का फर्क है। इसके बाद हुक्के का डिजाइन में रशियन हुक्का, खलील हुक्का, पीटट आदि की मांग सबसे ज्यादा रहती है। कुछ हुक्के विदेश से भी मंगाए जाते हैं। हुक्का भरने के लिए अलग से कर्मचारी लगाया जाता है जो निकोटिन और फ्लेवर को मिलाकर एक तरल बनाता है। उसे सिल्वर फॉयल, चारकोल आदि के साथ भरकर धुंआ निकाला जाता है। संचालक से मुताबिक एक हुक्के से 100 सिगरेट के बराबर धुंआ निकलता है।
दो दिन में दो हुक्का बार पर मारा छापा
पुलिस ने रविवार को ओल्ड फरीदाबाद शास्त्री कालोनी स्थित लखानी शोरूम के ऊपर चल रहे लेवल अप कैफे नाम के हुक्का बार में छापा मारकर बसेलवा काॅलोनी निवासी विशाल सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है। मौके पर चार हुक्का चिलम सहित बरामद हुए। जिसमें से दो हुक्का चालू हालत में थे। पुलिस को देखकर अन्य युवक मौके से फरार हो गए। शनिवार को पुलिस ने सेक्टर 16 में चल रहे कैफे 52 हुक्का बार में छापा मारकर एक युवक को गिरफ्तार किया था। कैफे मालिक बाढ़ मोहल्ला निवासी गुरुदत्त अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
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हरियाणा में फ्लेवर हुक्का पूरी तरह से बैन है। फरीदाबाद पुलिस हुक्का बार के खिलाफ विशेष अभियान चलाने जा रही है। सभी थाना और क्राइम ब्रांच को हुक्का बार बंद कराने के आदेश दिए हैं। - राकेश आर्य, पुलिस आयुक्त्र