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Faridabad News: नन्हीं जान से खिलवाड़, वैन व ई-रिक्शा में बिठाए जा रहे क्षमता से अधिक बच्चे

Wed, 16 Oct 2024 01:56 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2024 01:56 AM IST
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Playing with little lives, more children being accommodated in vans and e-rickshaws than their capacity
परिजनों को भी नहीं है परवाह, प्रशासन भी नहीं कर रहा कोई कार्रवाई, हादसे का इंतजार
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प्रशांत दीक्षित
फरीदाबाद। अपना समय बचाने के लिए अभिभावक अपने नन्हे-मुन्ने बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। स्कूल आने-जाने के लिए परिजनों ने बच्चों के लिए वैन व ई-रिक्शा लगाए हुए हैं। नियमों को नजरअंदाज करते हुए वैन व ई-रिक्शा चालक क्षमता से अधिक बच्चों को बिठाकर उनकी जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि पुलिस व प्रशासन ने भी इससे आंखें मूंद रखी हैं। कोई भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। शायद प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार है। शहर की कई व्यस्त सड़कों पर स्कूली वैन और ई-रिक्शा में बच्चों को जानवरों की तरह ठूंसकर बिठाने के नजारे देखे जा सकते हैं।
शहर के ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को घर से लाने और ले जाने के लिए स्कूल बसे, वैन और ई-रिक्शा चल रहे हैं। यहां कुछ बसें स्कूलों की निजी हैं तो कुछ ने प्राइवेट बसें लगवाई हुई हैं। स्कूल बसों की हालत तो फिर भी बेहतर है, लेकिन निजी वैन और ई-रिक्शा ने तो जैसे नियमों को ताक पर रखने की कसम ही खाई हुई है। नियम के अनुसार ई-रिक्शा में चार सवारी बिठाने की जगह होती है, लेकिन इसमें 10 से 12 बच्चों को बिठाकर उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है। चालक के साथ भी अतिरिक्त सीट लगाकर वहां भी बच्चों को बिठा दिया जाता है। इसी तरह स्कूल वैन में भी सात बच्चों से ज्यादा को नहीं बिठाया जा सकता है।
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यहां भी नियमों को नजरअंदाज कर 15 से 18 बच्चों को बिठाकर ले जाया जाता है। यहां तक की सीएनजी के सिलिंडर पर भी बच्चों को बिठा दिया जाता है। दूसरी ओर कुछ स्कूली बसों के ड्राइवर वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करते भी दिखाई देते हैं। इन वाहनों के खिलाफ न तो परिवहन विभाग कार्रवाई करता है और न ही ट्रैफिक पुलिस कोई एक्शन लेती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों को लेकर गाइड लाइन भी है, लेकिन शहर की सड़कों पर चालक पालन करते कहीं नजर नहीं आते हैं।
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यह नियम भी जरूरी...
वाहन चालक को न्यूनतम पांच वर्ष वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए। स्पीड गवर्नर एआरएआई से एप्रूव्ड लगा हो। सीट के नीचे बस्ते रखने और पीने के पानी की व्यवस्था हो। प्राथमिक उपचार के लिए फस्ट एड बॉक्स होना चाहिए। वाहन पर आगे-पीछे स्कूल का नाम, फोन नंबर स्पष्ट अक्षरों में लिखा होना चाहिए। लेकिन ज्यादातर स्कूली वाहनों में यह देखने को नहीं मिलते है।

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क्षमता से अधिक लोग बैठे वाहनों पर प्रतिदिन कार्रवाई करते हैं, स्कूली वाहनों पर भी नजर रखते हैं। ई-रिक्शा नियमों के चलते बच जाते हैं।
- विनोद कुमार, यातायात थाना प्रभारी
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