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Faridabad News: आरटीई के तहत दाखिला न देने वाले स्कूलों में से केवल आठ ने भरा जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत दाखिला नहीं देने वाले जिले के करीब 40 निजी विद्यालयों पर शिक्षा विभाग द्वारा जुर्माना लगाया गया था, लेकिन अब तक केवल आठ विद्यालयों ने ही जुर्माने की राशि जमा की है। शेष स्कूलों ने अभी तक जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई है। हालांकि ऐसे निजी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है।
जानकारी के अनुसार जिन विद्यालयों की मासिक फीस एक हजार रुपये तक है, उन पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं जिन स्कूलों की फीस एक से तीन हजार रुपये के बीच है, उन पर 70 हजार रुपये और इससे अधिक फीस लेने वाले विद्यालयों पर करीब एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई उन स्कूलों पर की गई है, जिन्होंने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों का ब्योरा नहीं दिया था।
आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया अप्रैल 2025 में शुरू होनी थी, लेकिन निजी विद्यालयों की लापरवाही के कारण यह समय पर शुरू नहीं हो सकी। निदेशालय ने पहले ही सभी निजी विद्यालयों से 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों की जानकारी मांगी थी, लेकिन अधिकांश स्कूलों ने आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया।
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बता दें कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित होती हैं। इन छात्रों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है और उनकी फीस सरकार वहन करती है। इसके बावजूद कई निजी विद्यालय नियमों की अनदेखी करते हैं, जिस पर अब विभाग सख्ती दिखा रहा है।
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फरीदाबाद। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत दाखिला नहीं देने वाले जिले के करीब 40 निजी विद्यालयों पर शिक्षा विभाग द्वारा जुर्माना लगाया गया था, लेकिन अब तक केवल आठ विद्यालयों ने ही जुर्माने की राशि जमा की है। शेष स्कूलों ने अभी तक जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई है। हालांकि ऐसे निजी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है।
जानकारी के अनुसार जिन विद्यालयों की मासिक फीस एक हजार रुपये तक है, उन पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं जिन स्कूलों की फीस एक से तीन हजार रुपये के बीच है, उन पर 70 हजार रुपये और इससे अधिक फीस लेने वाले विद्यालयों पर करीब एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई उन स्कूलों पर की गई है, जिन्होंने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों का ब्योरा नहीं दिया था।
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आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया अप्रैल 2025 में शुरू होनी थी, लेकिन निजी विद्यालयों की लापरवाही के कारण यह समय पर शुरू नहीं हो सकी। निदेशालय ने पहले ही सभी निजी विद्यालयों से 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों की जानकारी मांगी थी, लेकिन अधिकांश स्कूलों ने आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया।
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बता दें कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित होती हैं। इन छात्रों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है और उनकी फीस सरकार वहन करती है। इसके बावजूद कई निजी विद्यालय नियमों की अनदेखी करते हैं, जिस पर अब विभाग सख्ती दिखा रहा है।