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Faridabad News: शिकायतकर्ता की मंजूरी के बिना बंद नहीं होगी कोई शिकायत, नगर निगम ने बढ़ाई अधिकारियों की जवाबदेही
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम के समाधान शिविर में दर्ज होने वाली शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अब पहले से अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होगी। निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शिकायत को तब तक बंद नहीं माना जाएगा, जब तक शिकायतकर्ता स्वयं उसके समाधान पर संतुष्टि नहीं जताता। नई व्यवस्था का उद्देश्य कागजी निपटान पर रोक लगाकर लोगों की समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है।
अतिरिक्त आयुक्त परमजीत चहल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समाधान शिविर में आने वाली हर शिकायत के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से पुष्टि की जाए। यदि शिकायतकर्ता शिविर में मौजूद नहीं होगा तो उससे फोन पर संपर्क कर समाधान की जानकारी ली जाएगी और उसकी सहमति मिलने के बाद ही शिकायत का मामला बंद किया जाएगा।
नगर निगम सभागार में मेयर प्रवीण बत्रा जोशी की अध्यक्षता में प्रत्येक सोमवार आयोजित होने वाले समाधान शिविर में औसतन 60 से 65 शिकायतें पहुंचती हैं। इनमें सबसे अधिक मामले पेयजल आपूर्ति, सीवर ओवरफ्लो और सफाई व्यवस्था से जुड़े होते हैं। शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई कर रिपोर्ट भेज देने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
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हाल ही में जवाहर कॉलोनी और नंगला चौक क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो की शिकायतों में अस्थायी सफाई कर मामला निपटाने की कोशिश उजागर हुई थी। स्थानीय लोगों ने दोबारा समस्या पैदा होने पर निगम प्रशासन के समक्ष नाराजगी जताई, जिसके बाद अधिकारियों ने शिकायत निस्तारण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की।
नई व्यवस्था लागू होने से अब संबंधित अधिकारी केवल रिपोर्ट भेजकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकेंगे। शिकायतकर्ता की संतुष्टि को निस्तारण का आधार बनाए जाने से विभागीय जवाबदेही बढ़ेगी और समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में काम करने का दबाव भी बढ़ेगा।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से समाधान शिविर की विश्वसनीयता मजबूत होगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही, बार-बार एक ही समस्या की शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में कमी आने की उम्मीद है।
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फरीदाबाद। नगर निगम के समाधान शिविर में दर्ज होने वाली शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अब पहले से अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होगी। निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शिकायत को तब तक बंद नहीं माना जाएगा, जब तक शिकायतकर्ता स्वयं उसके समाधान पर संतुष्टि नहीं जताता। नई व्यवस्था का उद्देश्य कागजी निपटान पर रोक लगाकर लोगों की समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है।
अतिरिक्त आयुक्त परमजीत चहल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समाधान शिविर में आने वाली हर शिकायत के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से पुष्टि की जाए। यदि शिकायतकर्ता शिविर में मौजूद नहीं होगा तो उससे फोन पर संपर्क कर समाधान की जानकारी ली जाएगी और उसकी सहमति मिलने के बाद ही शिकायत का मामला बंद किया जाएगा।
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नगर निगम सभागार में मेयर प्रवीण बत्रा जोशी की अध्यक्षता में प्रत्येक सोमवार आयोजित होने वाले समाधान शिविर में औसतन 60 से 65 शिकायतें पहुंचती हैं। इनमें सबसे अधिक मामले पेयजल आपूर्ति, सीवर ओवरफ्लो और सफाई व्यवस्था से जुड़े होते हैं। शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई कर रिपोर्ट भेज देने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
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हाल ही में जवाहर कॉलोनी और नंगला चौक क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो की शिकायतों में अस्थायी सफाई कर मामला निपटाने की कोशिश उजागर हुई थी। स्थानीय लोगों ने दोबारा समस्या पैदा होने पर निगम प्रशासन के समक्ष नाराजगी जताई, जिसके बाद अधिकारियों ने शिकायत निस्तारण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की।
नई व्यवस्था लागू होने से अब संबंधित अधिकारी केवल रिपोर्ट भेजकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकेंगे। शिकायतकर्ता की संतुष्टि को निस्तारण का आधार बनाए जाने से विभागीय जवाबदेही बढ़ेगी और समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में काम करने का दबाव भी बढ़ेगा।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से समाधान शिविर की विश्वसनीयता मजबूत होगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही, बार-बार एक ही समस्या की शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में कमी आने की उम्मीद है।